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1 जुलाई 2027 से एंटीबायोटिक, वैक्सीन और कैंसर की दवाओं की हर बूंद का होगा हिसाब

दवा माफियाओं की अब खैर नहीं! 

केंद्र सरकार का कड़ा प्रहार

जानिए! ड्रग्स नियम में आया है बड़ा बदलाव, दवाइयों के दुरुपयोग पर लगाएगा लगाम

नई दिल्ली।

अब देश में दवाओं के नाम पर चल रही मनमानी और एंटीबायोटिक दवाओं के बेजा इस्तेमाल पर मोदी सरकार ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार ने औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 में बड़ा बदलाव करते हुए औषधि (सातवां संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। अब वैक्सीन, कैंसर की दवाएं और जीवन रक्षक एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री ‘ड्रग कंट्रोल’ की कड़ी निगरानी में होगी। इस कदम से स्पष्ट है कि सरकार दवा क्षेत्र में व्याप्त अव्यवस्था को जड़ से उखाड़ने के मूड में है।

क्या है नई व्यवस्था?

​केंद्र सरकार ने औषधि नियम, 1945 की अनुसूची H2 में बड़ा फेरबदल करते हुए एक नई ‘सारणी-2’ (Table-2) का गठन किया है। अब निम्नलिखित दवाएं इस कड़ी निगरानी सूची के दायरे में होंगी:

  • टीके (Vaccines): सभी प्रकार के वैक्सीन अब सीधे निगरानी में।
  • रोगाणुरोधी दवाएं (Antimicrobials/Antibiotics): एंटीबायोटिक का ओवरडोज या बिना डॉक्टरी पर्ची के बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • कैंसररोधी दवाएं: कैंसर जैसी घातक बीमारियों की दवाओं की हर बिक्री का रिकॉर्ड अनिवार्य।
  • नारकोटिक दवाएं: एनडीपीएस अधिनियम के तहत आने वाली सभी मादक और मनःप्रभावी दवाएं अब सरकार की पैनी नजर के घेरे में।

क्यों जरूरी था यह कदम?

​देश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ का खतरा बढ़ गया था। वहीं, कैंसर और नारकोटिक दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए भी लंबे समय से मांग उठ रही थी। इस संशोधन के बाद दवा निर्माताओं से लेकर खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों तक को इन दवाओं की ‘ट्रेसेबिलिटी’ का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। यानी दवा फैक्ट्री से निकलकर मरीज के हाथ में पहुंचने तक का पूरा सफर अब डिजिटल या लिखित दस्तावेजों में दर्ज होगा।

कब से लागू होगा नया फरमान?

​सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह संशोधित नियम 1 जुलाई 2027 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे। हालांकि, जनहित और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए, सभी रोगाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) दवाओं से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए 1 जुलाई 2028 तक की समयसीमा दी गई है।

पृष्ठभूमि: लंबा मंथन और ठोस नतीजा

​इन संशोधनों की रूपरेखा 16 अक्टूबर 2025 को ही राजपत्र (Gazette) में पेश कर दी गई थी। सरकार ने जनता, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और फार्मा सेक्टर से सुझाव मांगे थे। सभी आपत्तियों और सुझावों पर गहन मंथन के बाद, अंततः 22 जून 2026 को अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो अब फार्मा सेक्टर के लिए ‘नया नियम-पुस्तिका’ बन गई है।

फार्मा जगत में हलचल: केंद्र के इस कदम से थोक और खुदरा दवा विक्रेताओं को अपनी कार्यप्रणाली पूरी तरह बदलनी होगी। जानकारों का मानना है कि दवाओं की कालाबाजारी पर लगाम लगने से आम जनता को शुद्ध और सही दवाएं मिल सकेंगी और फर्जी दवाओं के कारोबार पर नकेल कसेगी।

📌 मुख्य बिंदु (संक्षेप में):

श्रेणी

प्रभावी तिथि

निगरानी का आधार

टीके, कैंसर और नारकोटिक दवाएं

1 जुलाई 2027

अनिवार्य प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड

रोगाणुरोधी (एंटीबायोटिक्स)

1 जुलाई 2028

एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस रोकथाम

नए नियमों के तहत अब दवा कारोबार को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की तैयारी है। 1 जुलाई 2027 (और कुछ मामलों में 2028) से प्रभावी होने वाले इन कड़े नियमों के लिए दवा विक्रेताओं (Retailers/Wholesalers), अस्पतालों और फार्मासिस्टों को अभी से अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा।

​यहाँ एक ‘तत्काल तैयारी चेकलिस्ट’ दी गई है, जिसे अपनाकर आप इन नियमों के दायरे में सुरक्षित रह सकते हैं:

🛡️ फार्मा सेक्टर के लिए ‘मास्टर चेकलिस्ट’ (1 जुलाई 2027 के लिए तैयारी)

1. रिकॉर्ड कीपिंग का डिजिटल और मैन्युअल ऑडिट

  • इन्वेंट्री मैनेजमेंट: अब से आपको ‘सारणी-2’ में आने वाली सभी दवाओं (टीके, एंटीबायोटिक, कैंसर और नारकोटिक) का स्टॉक रजिस्टर अलग से बनाए रखना होगा।
  • डिजिटल लेजर: मैनुअल रिकॉर्ड के साथ-साथ एक मजबूत डिजिटल इन्वेंट्री सिस्टम अपनाएं, जिसमें प्रत्येक बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और निर्माता का पूरा विवरण हो।
  • बिलिंग में पारदर्शिता: प्रत्येक बिल पर मरीज का विवरण और डॉक्टर का पूरा प्रिस्क्रिप्शन नंबर स्पष्ट होना चाहिए।

2. ‘ट्रेसेबिलिटी’ (Traceability) सुनिश्चित करना

  • सोर्स सत्यापन: केवल लाइसेंस प्राप्त थोक विक्रेताओं (Authorized Stockists) से ही माल खरीदें। अनधिकृत स्रोतों से खरीदी गई दवाओं का रिकॉर्ड न रख पाना भारी जुर्माने का कारण बन सकता है।
  • सप्लाई चेन मॉनिटरिंग: दवा कहां से आई और किसे बेची गई, इसका ‘ट्रैक-एंड-ट्रेस’ डेटा हर समय तैयार रखें।

3. प्रिस्क्रिप्शन (पर्ची) की अनिवार्यता

  • कठोर सत्यापन: याद रखें, नई अनुसूची H2 के तहत आने वाली दवाओं की बिक्री बिना वैध, स्पष्ट और हालिया डॉक्टर की पर्ची के कदापि न करें।
  • पर्ची का रिकॉर्ड: बेची गई दवाओं की पर्चियों को सुरक्षित फाइलिंग में रखें। यह विभाग द्वारा निरीक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा।

4. भंडारण (Storage) के विशेष मानक

  • टीकों (Vaccines) के लिए: टीकों के लिए कोल्ड-चेन (Cold-Chain) प्रबंधन और निरंतर तापमान रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करें। यदि तापमान में उतार-चढ़ाव का रिकॉर्ड नहीं मिला, तो आप पर कार्रवाई हो सकती है।
  • नारकोटिक दवाओं के लिए: एनडीपीएस (NDPS) के तहत आने वाली दवाओं को सुरक्षित लॉकर या अलमारी में अलग से रखें, जिसका एक्सेस केवल अधिकृत फार्मासिस्ट के पास हो।

5. फार्मासिस्ट और स्टाफ की ट्रेनिंग

  • अवेयरनेस कैंप: अपने स्टाफ और सेल्स एग्जीक्यूटिव्स को नए नियमों के प्रति प्रशिक्षित करें। उन्हें पता होना चाहिए कि कौन सी दवाएं ‘सारणी-2’ के दायरे में हैं।
  • समय सीमा का ध्यान: याद रखें, एंटीबायोटिक दवाओं के लिए 1 जुलाई 2028 तक का समय है, लेकिन अन्य के लिए 1 जुलाई 2027 ही अंतिम तारीख है। इस अंतर को समझें और उसी अनुसार स्टॉक को मैनेज करें।

⚠️ महत्वपूर्ण चेतावनी

​सरकार की निगरानी अब ‘सॉफ्टवेयर आधारित’ होगी। किसी भी प्रकार की शॉर्टकट या बिना पर्ची के बिक्री आपको सीधे कानूनी पचड़े में डाल सकती है। “बेचने से पहले रजिस्टर में दर्ज करें”—यही अब आपका मूल मंत्र होना चाहिए।

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Author: fastblitz24

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