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मक्का-मदीना जैसा सवाब: जफराबाद में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

 दुनिया में सिर्फ दो जगह होने वाली ‘सलातुत तारीफ’ नमाज़ में झुके हजारों सिर

​         जौनपुर। प्रदेश के जौनपुर अंतर्गत जफराबाद में बुधवार को आस्था का एक ऐसा महासंगम देखने को मिला, जिसकी गूंज पूरे देश में है। मौका था ‘चिरागे हिन्द’ हजरत मखदूम शेख सदरुद्दीन उर्फ बाबा हाजी हरमैन का सालाना उर्स। मान्यता है कि इस मुकद्दस स्थान पर उर्स के दिन नमाज़ अदा करने से मक्का-मदीना के बराबर सवाब (पुण्य) मिलता है। इसी अटूट विश्वास के साथ देश के कोने-कोने से आए हजारों जायरीनों से पूरा दरगाह परिसर पट गया।

​      दोपहर ठीक तीन बजे जैसे ही अकीदतमंदों ने दो रकात विशेष नमाज़ “सलातुत तारीफ नफिल” अदा की, पूरा माहौल ‘अल्लाह-हू-अकबर’ की सदाओं से गूंज उठा। हजारों सिर एक साथ खुदा की बारगाह में झुक गए और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की व कौमी एकता के लिए दुआएं मांगी गईं।

​दुनिया में सिर्फ दो जगह होती है यह विशेष नमाज़, जानिए इसका इतिहास

​इस ऐतिहासिक उर्स का मुख्य केंद्र बिंदु दोपहर तीन बजे अदा की जाने वाली दो रकात नफ़िल नमाज़ है। धार्मिक इतिहास के मुताबिक, बाबा हाजी हरमैन अपने जीवनकाल में कई बार पैदल मक्का हज करने गए थे। एक बार किसी अपरिहार्य कारणवश जब वह हज पर नहीं जा सके, तो उन्होंने अपने सैकड़ों सैनिकों के साथ इसी स्थान पर ठीक दोपहर 3:00 बजे यह विशेष नमाज़ अदा की थी। तभी से यह रवायत चली आ रही है। पूरी दुनिया में यह नमाज़ सिर्फ दो ही मुकाम पर अदा की जाती है—पहला पाकिस्तान का मुल्तान शहर और दूसरा उत्तर प्रदेश का यह ऐतिहासिक जफराबाद धाम।

आधी आबादी की पूरी भागीदारी: इस विशेष इबादत की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली, जब भीषण तपिश और उमस के बावजूद दरगाह पर महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। भीड़ में लगभग आधी तादाद मुस्लिम महिलाओं की रही, जिन्होंने पूरे अदब के साथ कतारबद्ध होकर नमाज़ अदा की और मन्नतें मांगीं।

​गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक, समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह ने चढ़ाई पहली चादर

​उर्दू महीने ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नौ तारीख को आयोजित होने वाले इस विशाल मेले की शुरुआत बुधवार सुबह पवित्र माहौल में कुरान खानी के साथ हुई। मेले में गंगा-जमुनी तहजीब का अनूठा नजारा देखने को मिला, जहां मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भी बाबा की मजार की कदमबोशी की।

​उर्स की शुरुआत में प्रसिद्ध समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह ने बाबा हाजी हरमैन की दरगाह पर पहली चादर चढ़ाई। इसके बाद से ही जायरीनों द्वारा मजार पर फूल, माला, अगरबत्ती, मुर्गा और मलीदा चढ़ाकर नियाज-फातिहा का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा।

​अखाड़े के जांबाज युवकों के हैरतअंगेज करतब

​सूरज ढलने के साथ ही मेला अपने पूरे शबाब पर आ गया। बाबा बंदिगी शाह की मजार से पारंपरिक लकड़ी का अखाड़ा और नातिया अंजुमन का जुलूस निकला, जो मुख्य मार्ग से होते हुए चौराहे पर पहुंचकर एक बड़े जलसे में तब्दील हो गया। अखाड़े के जांबाज युवकों ने लाठी-डंडों से एक से बढ़कर एक खतरनाक और हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिसे देखकर दर्शकों ने दांतों तले उंगली दबा ली।

​कमेटी ने संभाली कमान, मुसाफिरखाने में ठहरने के पुख्ता इंतजाम

​मेले को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न कराने में चिरागे हिन्द कमेटी ने पूरी ताकत झोंक दी। कमेटी के अध्यक्ष अबूसाद खान, सचिव एबाद अंसारी, कोषाध्यक्ष डॉ. नजीर भुट्टो, तहउवर खान, जमाल हाशमी और डॉ. सरफराज खान की मुख्य भूमिका रही। देश के अलग-अलग कोनों से आए जायरीनों की सहूलियत के लिए कमेटी की ओर से मुसाफिरखाने में ठहरने और ठंडे पेयजल के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

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Author: fastblitz24

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