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जौनपुर में बकरीद की धूम: शाही ईदगाह में शांतिपूर्ण संपन्न हुई नमाज

मौलाना बोले— ‘अल्लाह को गोश्त नहीं, बंदे की नीयत प्यारी है’।

​मछली शहर पड़ाव पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब;

प्रशासन रहा मुस्तैद, राजनेताओं ने पंडाल लगाकर किया नमाजियों का स्वागत

जौनपुर।

मछली शहर पड़ाव स्थित ऐतिहासिक शाही ईदगाह में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार पूरी अकीदत, अदब और शांतिपूर्ण माहौल में सकुशल संपन्न हुआ। सुबह से ही नए कपड़ों में सज-धजकर अकीदतमंदों का ईदगाह पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। शाही ईदगाह के इमाम एवं खतीब हज़रत मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी हन्फी ने हजारों नमाजियों को ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज अदा करवाई और मुल्क में अमन-चैन की दुआ मांगी।

​हज़रत इब्राहिम की सुन्नत: 5 हजार साल पुराना है इतिहास

​नमाज के बाद अपने खुतबे (धार्मिक भाषण) में मौलाना अब्दुज़ ज़ाहिर सिद्दीकी ने कुर्बानी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया:

  • इम्तिहान और समर्पण: अल्लाह ने अपने नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के जज्बे को आजमाने के लिए उनकी सबसे अजीज चीज—उनके बेटे हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी मांगी थी।
  • यूं बदला इतिहास: हज़रत इब्राहिम ने जैसे ही अल्लाह के हुक्म पर बेटे की गर्दन पर छुरी चलानी चाही, अल्लाह ने उनके इस जज्बे को कुबूल कर लिया। ऐन वक्त पर फरिश्ते जिब्रील अलैहिस्सलाम के जरिए वहां एक दुम्बा (नर भेड़) भेज दिया गया और बेटे की जगह उसकी कुर्बानी हुई।
  • शानो-शौकत का इजहार: इमाम साहब ने कहा कि इसी महान समर्पण की याद में पिछले पांच हजार साल से हर साल यह त्योहार मनाया जाता है। उन्होंने अपील की कि नमाज हमेशा खुले मैदान या ईदगाह में ही पढ़ें, ताकि कौम की शानो-शौकत और एकता का इजहार हो सके।

​इमाम की नसीहत: ‘हलाल कमाई से करें कुर्बानी, साफ-सफाई का रखें खास ख्याल’

​इमाम साहब ने खुतबे में इस्लामी और कानूनी दोनों तरीकों पर जोर देते हुए कहा कि कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह की राह में अपना सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा है। उन्होंने इसके सही तरीके और गाइडलाइंस साझा कीं:

कुर्बानी के कड़े नियम:

  • जानवर की सेहत: जानवर पूरी तरह तंदुरुस्त होना चाहिए। अंधापन, लंगड़ापन या कोई शारीरिक ऐब होने पर कुर्बानी जायज नहीं होगी।
  • गोश्त के तीन हिस्से: गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटें—पहला हिस्सा गरीबों-मिस्कीनों के लिए, दूसरा रिश्तेदारों-पड़ोसियों के लिए और तीसरा खुद के परिवार के लिए।
  • सोशल मीडिया पर नो-एंट्री: किसी भी प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न करें। साथ ही, कुर्बानी के फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर कतई पोस्ट न करें, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।

कचरा गाड़ी को सौंपें अवशेष: प्रशासन के निर्देशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि गंदगी खुले में न फेंकें। अवशेषों को गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबाएं या नगर पालिका की गाड़ी को दें।

​सियासी हलचल: पंडालों पर डटे रहे नेता, बच्चों में दिखा भारी उत्साह

​ईदगाह के बाहर इस बार सियासी रंग भी देखने को मिला। मुख्य विपक्षी दल के नेता और कार्यकर्ता ईदगाह के बाहर बड़े-बड़े पंडाल लगाकर मुस्तैद दिखे। वे नमाज पढ़कर निकलने वाले अकीदतमंदों को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दे रहे थे और अपनी सियासी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे रहे। दूसरी ओर, त्योहार को लेकर बच्चों में जबरदस्त उत्साह था। रंग-बिरंगे नए कपड़ों में बच्चे एक-दूसरे से गले मिलते और ईदी बांटते नजर आए।

​मुस्तैद रहा प्रशासनिक अमला

​त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए शासन की मंशा के अनुरूप सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। सभी आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सुबह से ही मौके पर डटे रहे। इस पावन मौके पर मुख्य रूप से नेयाज ताहिर शेखू, मोहम्मद शोएब अच्छू खान, ज़फ़र राजा, रियाजुल हक़, हाजी इमरान खान, मौलाना आफाक और अकरम मंसूरी समेत भारी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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Author: fastblitz24

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