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​दम तोड़ते तालाब, कंक्रीट होते शहर: जौनपुर में अब ‘छांव’ के लिए भी तरसेंगे लोग?

विश्व पर्यावरण दिवस पर फूटा सोशल फोरम का गुस्सा; DM को सौंपा ज्ञापन, चेताया- ‘जल और हरियाली नहीं बची, तो आने वाली पीढ़ियां पानी को तरसेंगी’

ब्यूरो, जौनपुर।

पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावों के बीच जौनपुर शहर की हवा और आबोहवा दोनों वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी हैं। सूखते जल स्रोत, पाताल में जाता भूजल स्तर और कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते शहर को लेकर अब जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर ‘जौनपुर सोशल फोरम’ के बैनर तले पदाधिकारियों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन की सुस्ती पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जौनपुर को रेगिस्तान बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।

जेसीज चौराहे पर कत्ल हुआ ‘बूढ़ा दरख्त’, राहगीर बेहाल

​सोशल फोरम ने नगर में घटती हरियाली को लेकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विकास के नाम पर शहर की प्रमुख सड़कों को पूरी तरह ‘गंजा’ कर दिया गया है।

    • सड़कों पर छांव का नामोनिशान नहीं: भीषण गर्मी में पैदल चलने वाले राहगीर, छात्र, बुजुर्ग और मजदूर बिना छांव के तपने को मजबूर हैं।
    • बलि चढ़ा पुराना पेड़: फोरम ने तीखा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि हाल ही में जेसीज चौराहे के पास यूनियन बैंक के सामने स्थित एक पुराने छायादार वृक्ष को बेरहमी से काट दिया गया। यह शहर के पर्यावरण के साथ सीधा खिलवाड़ है।

“पर्यावरण अब केवल प्रकृति या शौकिया चर्चा का विषय नहीं रह गया है। यह हमारे जनस्वास्थ्य, जल सुरक्षा, कृषि और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।”

फोरम के पदाधिकारी

तालाबों पर भू-माफिया का कब्जा, नदियां बनीं नाला!

​फोरम ने जिले में गहराते जल संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो तालाब और पोखरे कभी जौनपुर की लाइफलाइन हुआ करते थे, वे आज अतिक्रमण, प्रदूषण और सरकारी उपेक्षा का शिकार होकर दम तोड़ चुके हैं। आदि गंगा गोमती और सई जैसी पवित्र नदियों का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

जौनपुर सोशल फोरम की 5 बड़ी मांगें:
1. सड़कों का सर्वे कर पीपल, बरगद, नीम और पाकड़ जैसे स्थानीय छायादार पौधे लगाए जाएं।
2. नदियों और प्रमुख तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कर पुनर्जीवित किया जाए।
3. ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ (वर्षा जल संचयन) को सख्ती से लागू किया जाए।
4. सिंगल यूज प्लास्टिक पर सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि जमीनी प्रतिबंध लगे।
5. जिले के लिए एक ठोस ‘क्लाइमेट एक्शन प्लान’ तैयार किया जाए।

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Author: fastblitz24

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