जौनपुर में इस वर्ष अभी तक नहीं मिला एक भी मामला, जानें लक्षण और बचाव के उपाय
जौनपुर: वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही संक्रामक और वेक्टर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसी कड़ी में जिला मलेरिया अधिकारी ने दिमागी बुखार (जेई/एईएस – जापानी एन्सेफलाइटिस/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) को लेकर एक महत्वपूर्ण विज्ञप्ति जारी की है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और एहतियात बरतने की अपील की है। राहत की बात यह है कि जनपद जौनपुर में वर्ष 2025 में दिमागी बुखार के दो केस रिपोर्ट हुए थे, जबकि इस वर्ष अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है।
क्या है दिमागी बुखार और कैसे फैलता है?
जिला मलेरिया अधिकारी के अनुसार, दिमागी बुखार मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला एक वायरस जनित संक्रामक रोग है। इस वायरस के मुख्य होस्ट (आश्रयदाता) शूकर और जंगली पक्षी होते हैं। मादा क्यूलेक्स मच्छर इन संक्रमित जानवरों और पक्षियों से वायरस लेकर इंसानों में संक्रमण फैलाता है। यह बीमारी उन स्थानों पर अधिक फैलती है जहाँ लंबे समय तक जल-जमाव रहता है और गंदगी होती है, क्योंकि ऐसी जगहों पर शूकर और पक्षियों की मौजूदगी अधिक होती है। उत्तर प्रदेश के नेपाल और बिहार से सटे तराई क्षेत्रों में इसका खतरा ज्यादा रहता है, हालांकि छिटपुट मामले अन्य जिलों से भी आते रहते हैं।
दिमागी बुखार के प्रमुख लक्षण:
नोडल अधिकारी डॉ. आलोक सिंह ने बीमारी के निम्नलिखित लक्षण बताए हैं:
तेज सिरदर्द और बदन दर्द
तेज बुखार, उल्टी और मितली
बेहोशी और चक्कर आना
शरीर में झटके लगना और मानसिक भ्रम
बोलने में दिक्कत और मुंह से झाग आना
गंभीर मामलों में कोमा, लकवा या विकलांगता आना
बचाव और सावधानियाँ:
जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने नागरिकों से निम्नलिखित बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है:
सफाई रखें: घर के आस-पास साफ-सफाई रखें, झाड़ियां न उगने दें और जल-जमाव न होने दें।
मच्छरों से बचाव: सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और घर की खिड़कियों-दरवाजों पर मच्छररोधी जाली लगवाएं।
खान-पान में सावधानी: उथले हैंडपंप का पानी पीने से बचें।
टीकाकरण: बच्चों को जेई (जापानी एन्सेफलाइटिस) का टीका अवश्य लगवाएं।
तुरंत इलाज कराएं: लक्षण दिखते ही बिना देर किए जिला चिकित्सालय या विशेष चिकित्सालय जाएं। झोलाछाप डॉक्टरों और झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें।
मरीज की देखभाल: पीड़ित मरीज को पीठ के बल न लिटाकर बाएं या दाएं करवट लिटाएं। बेहोशी या झटके की स्थिति में मरीज के मुंह में कुछ भी न डालें।
सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम:
दिमागी बुखार की रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ‘संचारी दस्तक अभियान’ चला रही है। इसके तहत पंचायती राज, नगर विकास, पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर वर्ष में तीन बार साफ-सफाई, झाड़ी कटाई, जल निकासी, मच्छर ब्रीडिंग सोर्स सर्वे और लक्षणयुक्त मरीजों की पहचान जैसे कार्य कर रहे हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जेई टीकाकरण अभियान भी सघन रूप से चलाया जा रहा है।




