केराकत के धरौरा गांव में पट्टीदारों ने पार की हैवानियत की हदें; पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपियों सहित 4 को दबोचा

जौनपुर।

जनपद के थाना केराकत अंतर्गत धरौरा गांव में सोमवार को जमीनी रंजिश और आपसी वर्चस्व के खूनी खेल में एक 65 वर्षीय वृद्ध की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मात्र खेत में मिट्टी डालने जैसी मामूली बात को लेकर सगे पट्टीदारों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर बुजुर्ग को मौत के घाट उतार दिया। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत और तनाव का माहौल है।


खेत की मेड़ से लेकर श्मशान तक का सफर
प्राप्त विवरण के अनुसार, धरौरा गांव में दो पड़ोसी परिवार, जो आपस में सगे पट्टीदार भी हैं, के बीच खेत में मिट्टी डालने को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते इस मामूली विवाद ने एक उग्र रूप ले लिया। दोनों पक्षों की ओर से लाठी-डंडे निकल आए और जमकर मारपीट होने लगी। इस खूनी संघर्ष के बीच 65 वर्षीय बुजुर्ग रामदुलार सरोज को गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से लहूलुहान हालत में उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बुजुर्ग की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: 4 आरोपी गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही केराकत थाना पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) जौनपुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
परिजनों से प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने सुसंगत धाराओं में मुकदमा (अभियोग) पंजीकृत किया। पुलिस टीम ने त्वरित दबिश देते हुए इस हत्याकांड में शामिल 4 नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया है और गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल तैनात है।

संपादकीय चिंता: जमीन का छोटा सा टुकड़ा और इंसान की घटती कीमत
धरौरा गांव की यह हृदयविदारक घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जमीनी विवाद, मेड़ का झगड़ा या नाली-मिट्टी को लेकर होने वाली मारपीट तेजी से संगीन अपराधों और हत्याओं में तब्दील हो रही है, जो बेहद चिंता का विषय है।
बढ़ता अपराध और सामाजिक पतन:
मामूली पारिवारिक या पड़ोस के विवादों में लाठियां भांजना और किसी की जान ले लेना यह दर्शाता है कि समाज में धैर्य और आपसी संवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है। कानून का खौफ कम होना और छोटी-छोटी बातों पर ‘खून का बदला खून’ की मानसिकता एक सभ्य समाज के माथे पर कलंक है।
राजस्व और पुलिस प्रशासन को सजग होने की जरूरत:
अक्सर देखा जाता है कि जमीन के छोटे विवाद समय रहते नहीं सुलझाए जाते, जो बाद में ऐसे बड़े हत्याकांडों का रूप ले लेते हैं। प्रशासन को चाहिए कि ग्रामीण स्तर पर मेड़, जमीन और रास्ते के विवादों को गंभीरता से लेकर उनका त्वरित निपटारा करे, ताकि किसी और बेकसूर को अपनी जान न गंवानी पड़े।
Author: fastblitz24


