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जौनपुर की बेटी रिचा सिंह ने पहले प्रयास में मारी बाजी, बिना कोचिंग बनीं नायब तहसीलदार

मड़ियाहूं (जौनपुर)। प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है जनपद के बड़ेरी ग्राम की बेटी रिचा सिंह ने। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर मड़ियाहूं तहसील के एक छोटे से गांव की रिचा ने यूपी पीसीएस परीक्षा 2024 में अपने पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराते हुए नायब तहसीलदार के पद पर चयनित होकर इतिहास रच दिया है।
​बिना कोचिंग के हासिल किया मुकाम
​रिचा की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े शहर के महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। घर पर ही रहकर कड़ी मेहनत और अटूट लगन को अपना हथियार बनाया। रिचा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद के साथ-साथ अपने छोटे भाई शिवम सिंह (जेआरएफ, अर्थशास्त्र) और मामा अवनीश सिंह (सहायक अध्यापक, मुफ्तीगंज) के कुशल मार्गदर्शन को दिया है।
​गांव से शुरू हुआ ‘अफसरी’ का सफर
​रिचा की प्रारंभिक शिक्षा बड़ेरी गांव में ही हुई। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया।
​हाईस्कूल व इंटर: सेंट एंथोनी कान्वेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज, प्रयागराज।
​बीएससी: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर।
​पीजी: इलाहाबाद स्टेट यूनिवर्सिटी।
​पिता सहायक लिपिक, बेटी बनी अधिकारी
​रिचा के पिता धीरेन्द्र सिंह, जो प्रयागराज के सेंट एन्थोनी कान्वेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज में सहायक लिपिक के पद पर कार्यरत हैं, अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर गदगद हैं। उन्होंने बताया कि रिचा शुरू से ही मेधावी रही है और उसका लक्ष्य समाज सेवा करना था।
​”यह केवल मेरी सफलता नहीं है, बल्कि मेरे परिवार के विश्वास की जीत है। अगर सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण परिवेश के बच्चे भी आसमान छू सकते हैं।”
— रिचा सिंह, नव-चयनित नायब तहसीलदार
​बड़ेरी गांव में जश्न का माहौल
​रिचा के चयन की सूचना मिलते ही पूरे मड़ियाहूं क्षेत्र और बड़ेरी ग्राम सभा में हर्षोल्लास का माहौल है। गांव के लोगों का कहना है कि रिचा ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जनपद का नाम गौरवान्वित किया है। बधाई देने वालों का उनके घर पर तांता लगा हुआ है।

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Author: fastblitz24

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