
जौनपुर। भारत की सनातन संस्कृति में जहाँ ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ के मंत्र को जीवन का आधार माना गया है, उसी गौरव को आधुनिक राजनीति में प्रतिष्ठित करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से एक युगांतरकारी पहल की है। जनपद जौनपुर में आयोजित एक भव्य प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सभा सांसद सीमा द्विवेदी और शिक्षाविद् अर्चना सिंह ने इस अधिनियम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में भारतीय जनता पार्टी का ऐतिहासिक और साहसिक कदम बताया।


2029 का रण: मातृशक्ति के हाथों में होगी राष्ट्र की बागडोर
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य सभा सांसद सीमा द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार महिलाओं को केवल मतदाता नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता के रूप में मुख्यधारा में लाने हेतु संकल्पित है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि आगामी 16 से 18 अप्रैल तक आयोजित होने वाले संसद के विशेष सत्र में अधिनियम की तकनीकी बाधाओं को दूर किया जाएगा।
सांसद ने आगामी रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा:
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परिसीमन की नई दृष्टि: अब 2027 की जनगणना की प्रतीक्षा के बिना, 2011 के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन प्रक्रिया प्रारंभ करने पर विचार हो रहा है।
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संसद का विस्तार: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करने की योजना है, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। यह परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी का सबसे बड़ा अध्याय लिखेगा।
जन-जागरण का महाभियान: पदयात्रा से संवाद तक
सांसद द्विवेदी ने बताया कि यह अधिनियम केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए 14 से 18 अप्रैल तक पूरे जनपद में उत्सव का वातावरण रहेगा:
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- 14 अप्रैल: बूथ स्तर पर ‘महिला संवाद’ के माध्यम से अंतिम पायदान की महिला तक पहुंच।
- 15-17 अप्रैल: ‘नारी शक्ति पदयात्रा’ और स्कूटी रैलियों द्वारा जनजागरण।
- 18 अप्रैल: संसद सत्र की सफलता पर ‘विजय उत्सव’ का आयोजन।
“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश अब ‘महिला विकास’ (Women’s Development) के संकुचित घेरे से बाहर निकलकर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) की ओर बढ़ चुका है। यह अधिनियम आधी आबादी के आत्मविश्वास का प्रतीक है।” > — सीमा द्विवेदी, राज्य सभा सांसद
सांस्कृतिक और सामाजिक आह्वान
टी.डी. कॉलेज की प्राचार्या अर्चना सिंह ने इस अवसर पर मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सिद्धि हेतु इस अभियान का अभिन्न अंग बनें। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह समय दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सोचने का है। अर्चना सिंह के अनुसार, पंचायतों में सफल नेतृत्व सिद्ध करने के बाद अब महिलाएं संसद में अपनी निर्णय क्षमता का लोहा मनवाएंगी। आगामी वर्षों में भारत की संसद का स्वरूप और अधिक समावेशी होगा। ‘शक्ति वंदन अधिनियम’ न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा, बल्कि राष्ट्र के नीति-निर्धारण में मातृशक्ति की ममता और सामर्थ्य का समावेश भी करेगा। जहाँ विकास की सारथी स्वयं नारी शक्ति होगी।
Author: fastblitz24




