वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि: 47 संविदा शिक्षकों का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
भेदभाव का आरोप: ग्रेड पे और सीपीएफ कटौती की मांग को लेकर शिक्षकों ने खटखटाया न्यायालय का दरवाजा

जौनपुर। संवाददाता


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के परिसर पाठ्यक्रमों में कार्यरत 47 संविदा शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। काफी समय से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहे इन शिक्षकों ने अंततः उच्च न्यायालय प्रयागराज की शरण ली है। शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके साथ ‘दोहरा मापदंड’ अपना रहा है।
20 वर्षों की सेवा, फिर भी उपेक्षा
याचिकाकर्ता शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले दो दशकों से विश्वविद्यालय को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो 5770 का ग्रेड पे दिया जा रहा है और न ही उनकी सीपीएफ (कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड) की कटौती की जा रही है। शिक्षकों ने बताया कि वे लंबे समय से इस मांग को लेकर विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे थे, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
विभागीय भेदभाव का लगाया आरोप
शिक्षकों ने अपनी याचिका में भेदभाव का गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका तर्क है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एक ही संस्थान में दो तरह के नियम लागू कर रहा है। आरोप है कि फार्मेसी और एलएलबी विभाग के संविदा शिक्षकों के साथ-साथ हाल ही में नियुक्त हुए नए संविदा शिक्षकों को ग्रेड पे और सीपीएफ कटौती का लाभ दिया जा रहा है, जबकि 20 वर्षों से सेवा दे रहे 47 शिक्षकों को इस लाभ से वंचित रखा गया है।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
उच्च न्यायालय में गुहार लगाने वाले इन 47 शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है। शिक्षकों ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि अब भी उनकी न्यायोचित मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे भविष्य में उग्र आंदोलन या किसी भी स्तर पर संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल, अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के रुख पर टिकी हैं।
मुख्य बिंदु:
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याचिकाकर्ता: परिसर पाठ्यक्रमों के 47 संविदा शिक्षक।
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प्रमुख मांग: 5770 ग्रेड पे और सीपीएफ कटौती का लाभ।
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आरोप: फार्मेसी व एलएलबी विभाग के शिक्षकों को मिल रहा लाभ, पुराने शिक्षकों की अनदेखी।
Author: fastblitz24



