जौनपुर। जिले में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार के नाम पर पुलिस का ‘रस्म-अदायगी’ वाला अभियान रविवार को उस वक्त बौना साबित हो गया, जब चंद घंटों के भीतर दो अलग-अलग हादसों ने दो युवकों की जिंदगी लील ली। एक तरफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस टीमें सड़कों पर खड़ी होकर चालान की रसीदें फाड़कर अपनी पीठ थपथपा रही थीं, तो दूसरी तरफ बेखौफ और अनियंत्रित वाहन सड़कों पर खून की होली खेल रहे थे।

शहनाइयों के गूंजने से पहले ही उठ गई अर्थी: शादी का कार्ड बांटकर लौट रहे युवक को ट्रेलर ने कुचला
पहली रूह कंपा देने वाली घटना जलालपुर थाना क्षेत्र के त्रिलोचन के पास हुई। सुजानगंज के चेती शंकरगंज निवासी अरविंद निषाद (29 वर्ष) जिसकी 13 मई को शादी होनी थी, वह अपनी ही शादी का कार्ड बांटकर वापस घर लौट रहा था। उसे क्या पता था कि जिस खुशी का न्योता वह अपनों को दे रहा है, वही उसकी आखिरी यात्रा बन जाएगी।
- खूनी रफ्तार का कहर: एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने अरविंद की बाइक को ऐसी टक्कर मारी कि उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
- मातम में बदली खुशियां: जिस घर में हल्दी और तेल की रस्में होनी थीं, वहां अब कोहराम मचा है। ट्रेलर चालक सरेआम पुलिस को ठेंगा दिखाकर वाहन समेत फरार हो गया।
लखमापुर में ऑटो ने मचाया तांडव: खरीदारी करने आए युवक की मौत
अभी जलालपुर की घटना की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि खेतासराय थाना क्षेत्र के लखमापुर बाजार में अभय कुमार (24 वर्ष) नाम के युवक को एक अनियंत्रित ऑटो ने मौत की नींद सुला दिया।
- पुलिस की नाक के नीचे हादसा: शाम 6 बजे जब पुलिस सड़कों पर मुस्तैद होने का दावा कर रही थी, तभी एक ऑटो ने बाइक को जोरदार टक्कर मारी। सिर में गंभीर चोट लगने से अभय ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। यहां भी हत्यारा चालक पुलिस की पहुंच से बाहर निकलने में कामयाब रहा।
आंकड़ों की बाजीगरी या सुरक्षा का ढोंग? 1211 चालान, फिर भी दो लाशें!
रविवार को पूरे जनपद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह के निर्देशन में भारी पुलिस बल सड़कों पर था। पुलिस के दावों पर नजर डालें तो:


- 1211 वाहनों का चालान किया गया।
- सघन चेकिंग और संदिग्धों की तलाश का दावा किया गया।
बड़ा सवाल: अगर पुलिस इतनी ही मुस्तैद थी, तो ये खूनी वाहन चालक घटना को अंजाम देकर फरार कैसे हो गए? क्या पुलिस का काम सिर्फ हेलमेट और कागजों के नाम पर आम जनता की जेब ढीली करना है? सड़कों पर दौड़ रहे इन ‘कातिल’ वाहनों और बेलगाम चालकों पर नकेल कसने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है।
एक तरफ पुलिस के चालान का रिकॉर्ड बना, तो दूसरी तरफ दो घरों के चिराग बुझ गए। जनता अब पूछ रही है- ये कैसी सुरक्षा है कप्तान साहब?
Author: fastblitz24




