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फर्जीवाड़े की नींव पर ‘साम्राज्य’ बचाने का खेल: राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन में करोड़ों की संपत्ति-FDs पर नीयत

राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन में करोड़ों की संपत्ति-FDs पर नीयत, रातोंरात जुटाए जा रहे ‘अनाम’ समर्थन पत्र

​धारा 182-340 के शिकंजे और FIR के बाद भी नहीं थमा षड्यंत्र! 40 हजार दवा विक्रेताओं के भरोसे का कत्ल कर संस्था की विरासत हथियाने की हो रही ‘अंडर टेबल’ सेटिंग

​फर्स्ट ब्लिट्ज एक्सक्लूसिव (जयपुर):

“जब सत्ता का प्रलोभन कानून से बड़ा होने लगे और करोड़ों की संपत्ति पर कब्जे की नीयत नीतियों पर हावी हो जाए, तो अंधेरे के साए में झूठ की इमारतें चुनी जाती हैं!”

​राजस्थान के करीब 40 हजार दवा विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले शीर्ष संगठन में इन दिनों कुर्सी बचाने, करोड़ों की चल-अचल संपत्ति को ठिकाने लगाने और जाली दस्तावेजों के दम पर सच को दबाने का ऐसा घिनौना ‘गोरखधंधा’ चल रहा है, जिसने पूरे व्यापारी समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जयपुर के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी और फर्जी हलफनामे की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हो चुकी है, तो दूसरी तरफ अब सच को छुपाने के लिए जिलों में ‘अंडर टेबल’ समर्थन पत्र जुटाने का गंदा खेल रातोंरात खेला जा रहा है।

 

​फर्जी हलफनामे का सच: ₹50 के स्टाम्प पर खेला गया करोड़ों का खेल

​राजस्थान केमिस्ट एसोसिएशन (RCA) के अस्तित्व में रहते हुए शीर्ष पदों पर बैठे आकाओं ने अपने पद का न केवल दुरुपयोग किया, बल्कि ‘राजस्थान केमिस्ट अलायंस’ नाम की एक समानांतर फर्जी संस्था खड़ी कर दी।

​जांच में सामने आया है कि रजिस्ट्रार नॉन-ट्रेडिंग कंपनीज के समक्ष जमा कराए गए ₹50 के स्टाम्प पेपर पर शासकीय प्राधिकारी को गुमराह करने के लिए असत्य घोषणाएं की गईं। शपथ-पत्र के बिंदु संख्या 10 में दावा किया गया कि आवेदक किसी अन्य समान संस्था के पदाधिकारी नहीं हैं, जबकि हकीकत यह थी कि धनपत सेठिया, रवि मित्तल और रवि भूषण पूरी पुरानी रजिस्टर्ड संस्था में मुख्य पदों पर काबिज थे।

​कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीधे तौर पर IPC/CrPC की धारा 182 और 340 का खुला उल्लंघन है, जिसके तहत झूठी सूचना देकर सरकारी तंत्र को गुमराह करने पर सख्त सजा का प्रावधान है।

​2 करोड़ की बिल्डिंग और 54 लाख की FDs पर नीयत!

​यह पूरा षड्यंत्र केवल पद की भूख तक सीमित नहीं है, इसके पीछे करोड़ों रुपये के फंड और संपत्तियों का बड़ा गणित है:

  • ​फिल्म कॉलोनी का कीमती भवन: जयपुर के दवा बाजार स्थित भवन संख्या 512 (अनुमानित मूल्य ₹2 करोड़ से अधिक) पर कब्जे का जाल बुना गया।
  • ​बैंक FDs पर डोरे: संस्था के नाम जमा लगभग ₹54 लाख की एफडी (FDs) और फंड को नई फर्जी संस्था के खातों में ट्रांसफर करने की पूरी तैयारी थी।
  • ​200 आजीवन सदस्यों से विश्वासघात: 200 आजीवन सदस्यों और 40 हजार केमिस्टों के खून-पसीने के पैसे व अधिकारों को दरकिनार कर संस्था को अपनी ‘निजी जागीर’ बनाने का प्रयास किया गया।

​इसी आधार पर जयपुर के कोतवाली थाने में FIR No. 0189/2023 दर्ज की गई, जिसमें पुलिस ने IPC की धारा 419, 420, 467, 471 और 120-B (धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

​नया डेवलपमेंट: ‘अंधेरे में दस्तखत’ – रातोंरात क्यों मांगे जा रहे समर्थन पत्र?

​FIR और अदालती मुकदमों के कानूनी शिकंजे में फंसने के बाद अब इस गोरखधंधे के सूत्रधारों ने नया दांव खेला है। Fast Blitz 24 को मिली जानकारी के मुताबिक, एलायंस के कर्ता-धर्ता अरविंद गुप्ता और उनकी टीम द्वारा विभिन्न जिलों का गुपचुप दौरा कर बिना तारीख, बिना स्पष्ट विषय और बिना किसी एजेंडे के रातोंरात समर्थन पत्र (Support Letters) एकत्रित किए जा रहे हैं।

​केमिस्ट समाज के वे 5 तीखे सवाल, जिनका जवाब गायब है:

  1. ​पारदर्शिता से भागने की हड़बड़ी क्यों? बिना पूर्व सूचना के रातोंरात जिला संस्थाओं से सादे या अनाम कागजों पर दस्तखत क्यों करवाए जा रहे हैं?
  2. ​आय-व्यय और ऑडिट का हिसाब कहाँ है? क्या जिला निकायों को संस्था की संपत्तियों, पिछले कार्यकाल की ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय लेन-देन का ब्योरा दिया गया?
  3. ​क्या बिना तारीख का कागज़ भविष्य का षड्यंत्र है? जिन समर्थन पत्रों पर न तारीख है और न ही प्रस्ताव का विवरण, उनका इस्तेमाल भविष्य में किस फर्जीवाड़े के लिए किया जाएगा?
  4. ​क्या लोकतंत्र पर तमाचा है यह प्रक्रिया? बिना स्वतंत्र सहमति और बिना एजेंडा उजागर किए दस्तखत लेना क्या धोखाधड़ी की श्रेणी में नहीं आता?
  5. ​असंतोष को दबाने की कोशिश? क्या संगठन के भीतर पनप रहे भारी जन-आक्रोश को छुपाने के लिए कागजी समर्थन का फर्जी ढांचा खड़ा किया जा रहा है?

​⚠️ Fast Blitz 24 की चेतावनी: व्यापारी भाई होशियार रहें!

​राजस्थान का केमिस्ट समाज किसी की निजी संपत्ति या जागीर नहीं है। यह 40 हजार परिवारों के आत्मसम्मान और आजीविका से जुड़ा ढांचा है।

​सावधान!

हेर-फेर किए गए दस्तावेजों या किसी भी अनाम/बिना एजेंडे वाले कागजात पर बिना पूरी जानकारी के हस्ताक्षर करना आपके अपने हितों के खिलाफ हो सकता है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे सत्ता और संपदा हथियाने की इस कोशिश को बेनकाब करना हर व्यापारी का कर्तव्य है। पहले पूरी जानकारी, फिर समर्थन; पहले वित्तीय पारदर्शिता, फिर कोई फैसला!

 

​Fast Blitz 24 की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है। कोर्ट की हर कार्रवाई और फाइलों में छिपे हर सच को हम लाते रहेंगे आपके सामने।

​(ब्यूरो रिपोर्ट – Fast Blitz 24, जयपुर)

Fast Blitz 24
Author: Fast Blitz 24

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