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निष्ठापूर्वक काम का मिला ‘लाठियों’ का इनाम, राज यादव बोले— गरीब प्रेरकों का हक मार रही सरकार, यह कायरता का प्रमाण!
“विश्व साक्षरता दिवस के जश्न के बीच जानिए उत्तर प्रदेश के उन सवा लाख साक्षरता प्रेरकों का दर्द, जिन्हें 32 महीने से नहीं मिला मानदेय और हक मांगने पर मिलीं सिर्फ लाठियां!”
विशेष संवाददाता
जौनपुर
विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के हजारों पूर्व शिक्षा प्रेरकों की बदहाली और लंबित मांगों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। आदर्श लोक शिक्षा प्रेरक वेलफेयर एसोसिएशन, जौनपुर के जिला उपाध्यक्ष राज यादव ने रविवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्ठापूर्वक सेवाएं देने के बावजूद प्रदेश के लगभग सवा लाख शिक्षा प्रेरक पिछले कई वर्षों से अपने 32 महीने के बकाए मानदेय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
राज यादव के अनुसार, साक्षर भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के प्रत्येक ग्राम पंचायत स्थित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक महिला और एक पुरुष शिक्षा प्रेरक की नियुक्ति की गई थी। इन प्रेरकों को 2,000 रुपये प्रतिमाह के अल्प मानदेय पर गांव के 14 से 35 वर्ष के अशिक्षित लोगों को साक्षर बनाने के साथ-साथ बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और अन्य प्रशासकीय कार्यों में लगाया गया था।
अचानक संविदा समाप्ति से गहराया बेरोजगारी का संकट
एसोसिएशन ने राज्य सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि 31 मार्च 2018 को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा एक साथ सभी शिक्षा प्रेरकों का अनुबंध समाप्त कर दिया गया। इस फैसले के चलते केवल जौनपुर जनपद के 3,028 और पूरे उत्तर प्रदेश के लगभग 1.25 लाख प्रेरक रातों-रात बेरोजगार हो गए।
यादव ने कहा, “लगातार धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और आमरण अनशन के बावजूद सरकार ने इन गरीब प्रेरकों की सुध नहीं ली। न तो उनकी संविदा अवधि का विस्तार किया गया और न ही उनके 32 महीनों के बकाए मानदेय का भुगतान किया गया।”
लोकतांत्रिक प्रदर्शनों पर दमन का आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में सरकार की कार्यशैली की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया गया कि जब भी प्रेरकों ने अपने वैधानिक अधिकारों और मानदेय के लिए राजधानी लखनऊ में शांतिपूर्ण आंदोलन करने का प्रयास किया, उन पर पुलिस बल का प्रयोग कर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं। एसोसिएशन ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और कायरता करार दिया।
साक्षरता दिवस के संदर्भ का उल्लेख करते हुए संगठन ने केंद्र एवं राज्य सरकार से अपील की है कि वे इस मानवीय संकट पर तत्काल संज्ञान लें। एसोसिएशन ने मांग की है कि प्रेरकों का वर्षों से लंबित 32 महीने का मानदेय अविलंब जारी किया जाए और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित नीति बनाई जाए।




