ट्रायल पूरा होने के बाद भी आसान नहीं होगा रास्ता: ‘IND डिवीजन‘ की कड़ी जांच से गुजरना होगा, NDCT रूल्स 2019 के तहत कड़े हुए नियम
क्या विदेशी ट्रायल के नाम पर भारतीय मरीजों को बनाया जा रहा था ढाल?
नॉन-क्लिनिकल से लेकर क्लिनिकल डेटा का पाई-पाई का हिसाब: विदेशों में रिव्यू के अधीन फंसी दवाओं की अब भारत में सीधी एंट्री बैन
नई दिल्ली: देश में मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। दुनिया में कहीं भी स्वीकृत (Approved) न हुई, लेकिन भारत में फेज-3 ग्लोबल क्लिनिकल ट्रायल (GCT) के दौर से गुजर रही या ट्रायल पूरा कर चुकी नई दवाओं के आयात (Import) और मार्केटिंग की प्रक्रिया को अब और सख्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत आने वाले CDSCO के न्यू ड्रग्स डिवीजन ने एक नया सर्कुलर जारी कर साफ किया है कि ऐसी दवाओं के सभी आवेदनों का केंद्रीय स्तर पर कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
CDSCO के संज्ञान में आया था कि कई दवा कंपनियां ऐसी नई दवाओं को भारतीय बाजार में उतारने और आयात करने की अनुमति मांग रही थीं, जिन्हें दुनिया के किसी भी अन्य देश में अब तक मंजूरी नहीं मिली है। इनमें से कई दवाओं के ‘फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल’ में भारतीय नागरिकों ने भी भाग लिया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CDSCO की आंतरिक तकनीकी समिति (Internal Technical Committee) ने इस पर विस्तृत मंथन किया। समिति ने पाया कि जो दवाएं विदेशी नियामक प्राधिकरणों (Foreign Regulatory Authorities) की समीक्षा के अधीन हैं, उनके जोखिम और प्रभावों को जांचना बेहद जरूरी है।
’IND डिवीजन’ करेगी विस्तृत समीक्षा
तकनीकी समिति की सिफारिशों के बाद यह तय किया गया है कि:
”इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (IND) के ऐसे सभी आवेदनों की जांच अब ‘न्यू ड्रग्स और क्लिनिकल ट्रॉयल्स रूल्स, 2019’ (NDCT Rules, 2019) के तहत की जाएगी। इसके तहत दवाओं के नॉन-क्लिनिकल और क्लिनिकल डेटा का व्यापक व गहन मूल्यांकन अनिवार्य होगा।”
— CDSCO सर्कुलर के अनुसार
आवेदकों को सीधा निर्देश: न्यू दिल्ली HQ में ही जमा होंगे आवेदन
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, सभी संबंधित आवेदकों और फार्मा कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों से जुड़े अपने सभी आवेदन सीधे IND डिवीजन, CDSCO (मुख्यालय), नई दिल्ली में जमा करें।
मायने क्या हैं?
सरकार के इस कदम से भारतीय मरीजों पर बिना पूरी तरह से प्रमाणित हुई विदेशी दवाओं के सीधे इस्तेमाल पर रोक लगेगी और बाजार में सिर्फ वही दवाएं आ सकेंगी जो सुरक्षा व प्रभावशीलता के कड़े मानकों पर खरी उतरेंगी।




