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सॉरी सावरकर के नारे लगाने पर दलित-पिछड़े छात्र निलंबित

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विनायक दामोदर सावरकर के प्रति व्यंग्यात्मक नारे लगाने पर 10 छात्रों को छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है. ये सभी छात्र दलित और पिछड़े समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. मामला शुरू हुआ जब 6 नवंबर को जेएनयू छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) की हार और वाम गठबंधन की जीत के बाद वर्धा विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने कैंपस में नारेबाज़ी की, और ‘सॉरी सॉरी सावरकर’ तथा ‘भाग नरेंद्र’ के नारे लगाए.

विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे और एआईएसएफ (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन) से जुड़े चंदन सरोज कहते हैं, ‘सावरकर के सिद्धांतों को मानने वाले एबीवीपी के लिए ‘सॉरी-सॉरी सावरकर’ का नारा असहनीय साबित हुआ. अगले ही दिन एबीवीपी ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का घेराव कर दिया. उनका आरोप था कि सावरकर जैसे ‘महापुरुष’ का अपमान किया गया है. प्रशासन ने 7 नवंबर को छह छात्रों (कौशल कुमार, कर्णवीर सिंह, बृजेश सोनकर, राकेश अहिरवार, अश्विनी सोनकर और धनंजय सिंह) को शो-कॉज नोटिस जारी किए. इन छात्रों में चार अनुसूचित जाति (एससी) और दो अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) के छात्र शामिल थे.

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Author: fastblitz24

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