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भारत से लेकर इंडोनेशिया तक ग्लोबल वार्मिंग का कहर

 

अमेजन के घने जंगलों के बीच बसे एक छोटे से शहर बेलम में संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP30 गत 10 नवंबर को शुरू हो गया है। यह गर्म हो रही धरती के बढ़ते तापमान को थामने का एक प्रयास है। संयुक्त राष्ट्र का वार्षिक जलवायु सम्मेलन कॉप 30, ब्राज़ील के बेलेम शहर में हो रहा है। इसमें स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, बाढ़, सूखा, तूफान समेत चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए सहन क्षमता निर्माण और देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने जैसे समाधानों की पुकार लगाई गई है। जलवायु परिवर्तन से भारत समेत पूरी दुनिया जूझ रही है। भीषण बाढ़ और सूखे की घटनाएं तेज हो गई हैं।

इस बार की बैठक में तीन शब्द बार-बार गूंजे- फॉसिल फ्यूल्स, फाइनेंस और फॉरेस्ट। दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए फॉसिल फ्यूल यानी लकड़ी, कोयला, पेट्रोल छोड़ने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों जैसे हीट वेव्स, बाढ़, तूफ़ान, बादल फटने से बेघर हुए लोगों और बर्बाद हुए शहरों को क्लाइमेट रेसिलिएंट (जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रतिरोधी बनाए के लिए) फंडिंग बढ़ाने और जंगल बचाने पर दुनिया एकजुट हुई है। फॉसिल ईंधन से मुक्त अर्थव्यवस्था, सस्ती स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षित जंगल, यही वह तीन मोर्चे हैं, जिन पर आने वाले दशक की जलवायु लड़ाई लड़ी जाएगी।

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Author: fastblitz24

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