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जौनपुर पुलिस का महा-फेलियर! 25 लाख की डकैती को बीते डेढ़ महीने, पर खाकी के हाथ अभी भी खाली!

एसपी और क्राइम ब्रांच की फौज भी पस्त: चौकीखुर्द में गोलियां बरसाकर भागे थे बेखौफ बदमाश, जांच के नाम पर सिर्फ ‘ढाक के तीन पात’!

मीरगंज (जौनपुर):

          प्रदेश में कानून-व्यवस्था के लाख दावों के बीच जौनपुर पुलिस की नाकामी का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। मीरगंज क्षेत्र के चौकीखुर्द गांव में हुई 25 लाख रुपये की सनसनीखेज चोरी को डेढ़ महीना (45 दिन) बीत चुका है, लेकिन अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना तो दूर, जौनपुर पुलिस और उसकी हाईटेक क्राइम ब्रांच बदमाशों की परछाई तक नहीं छू पाई है। आला अफसरों की गाड़ियां गांव के चक्कर काटकर लौट गईं, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा।

गोलियां बरसाते हुए माल उड़ा ले गए थे दुस्साहसी बदमाश

​याद दिला दें कि बीते 3 मई को चौकीखुर्द गांव निवासी अवधेश तिवारी और लालता तिवारी के घरों को निशाना बनाकर बदमाशों ने धावा बोला था। अपराधी बड़े आराम से करीब 25 लाख रुपये के जेवरात और एक लाख रुपये कैश समेटकर रफूचक्कर हो गए। हद तो तब हो गई जब पीछा करने वाले ग्रामीणों पर बदमाशों ने सरेआम फायरिंग झोंक दी। पुलिस को मौके से जिंदा कारतूस भी मिला, जो इस बात का सबूत था कि बदमाश किस कदर बेखौफ थे।

अफसरों की फौजी परेड… नतीजा ढाक के तीन पात!

​मामला जब तूल पकड़ने लगा तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कुँवर अनुपम सिंह और एसपी ग्रामीण आतिश कुमार ने खुद भारी पुलिस बल के साथ गांव का दौरा किया। क्राइम ब्रांच और सर्विलांस की टीमें दिन-रात कॉल डिटेल (CDR) खंगालने और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालती  रहीं। बीते गुरुवार को खुद एसएसपी रात के अंधेरे में पीड़ित परिवारों और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरुण पाण्डेय से मिलने पहुंचे, बड़े-बड़े वादे किए और जल्द खुलासे का ‘रटा-रटाया’ आश्वासन देकर चले गए। लेकिन हफ्ता बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ सिर्फ सिफर (शून्य) लगा है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, खौफ के साए में जीने को मजबूर लोग

​इतने लंबे समय के बाद भी पुलिस के हाथ खाली होने से चौकीखुर्द और आस-पास के गांवों में भारी नाराजगी और उबाल है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब इतने बड़े-बड़े अधिकारियों और स्पेशल टीमों के आने के बाद भी एक चोरी का सुराग नहीं लग पा रहा, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। गांव में आज भी चोरों और डकैतों का खौफ बना हुआ है।

अब थानेदार से ही बची है आखिरी उम्मीद

इस पूरे नाकारा सिस्टम के बीच ग्रामीणों को अब मीरगंज के थानाध्यक्ष अरविंद सिंह की बढ़ती सक्रियता से थोड़ी उम्मीद जागी है। अब देखना यह है कि क्या थानाध्यक्ष अपने आला अफसरों की नाक कटने से बचा पाते हैं या फिर अपराधियों का यह सिंडिकेट जौनपुर पुलिस को ऐसे ही ठेंगा दिखाता रहेगा।

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Author: fastblitz24

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