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धर्मांतरण के खिलाफ ‘नारी शक्ति’ की हुंकार: जौनपुर में गूंजा धर्मादेश, देश को बदलने की तैयारी!

सांस्कृतिक पुनर्जागरण का महाशंखनाद: हिंदू-मुस्लिम महिलाओं ने एक मंच पर आकर तोड़ा जाति-धर्म का मिथक; बीएचयू की जीनत रहमान बोलीं— ‘लालच का खेल खेलने वालों को महिलाएं सिखाएंगी सबक’

जलालपुर (जौनपुर), 17 जून।

​सिद्ध पीठ बड़कू हनुमान जी आश्रम के विशाल प्रांगण में चल रहे अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुम्भ के आठवें दिन बुधवार को धर्मांतरण के खिलाफ देश की मातृशक्ति ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। हजारों नर-नारियों ने एक सुर में हाथ उठाकर धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव पारित किया और राष्ट्र विरोधी ताकतों को कड़ा संदेश दिया। इस महाकुंभ में जाति और धर्म की दीवारें पूरी तरह ढह गईं, जब हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने एक साथ मंच साझा कर भारत की मूल संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नागपुर के वरिष्ठ प्रचारक व अंतरराष्ट्रीय सामाजिक चिंतक प्रशांत हरतालकर, रामपंथ के पंथाचार्य डॉ. राजीव श्रीगुरुजी, जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज और बीएचयू युवा परिषद की चेयरपर्सन जीनत रहमान सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से मशाल जलाकर इस सांस्कृतिक क्रांति का बिगुल फूँका।

‘हमलावरों ने धन नहीं, हमारी संस्कृति को लूटा’

​बीएचयू युवा परिषद की चेयरपर्सन जीनत रहमान ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा—

​”आज हमारा देश आंतरिक शत्रुओं से जूझ रहा है। अतीत में अरबों, तुर्कों, ईरानियों और मंगोलों के आक्रमण का मकसद सिर्फ धन लूटना नहीं, बल्कि भारत की महान संस्कृति को नष्ट करना था। इसी धर्मांतरण के कारण अपने ही लोग आज खुद को विदेशी समझने लगे हैं और भाई-भाई का दुश्मन बन गया है। यदि हमारी दया, करुणा और सहनशीलता की संस्कृति को नष्ट न किया गया होता, तो इस धरती पर कभी आतंकवाद नहीं पनपता।”

 

​जीनत ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज भी कुछ मिशनरियां सेवा के बहाने लालच देकर धर्मान्तरण का राष्ट्रविरोधी खेल खेल रही हैं, लेकिन अब यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण रुकने वाला नहीं है।

मतांतरण ही है ‘राष्ट्रांतरण’: प्रशांत हरतालकर

​आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक प्रशांत हरतालकर ने दोटूक शब्दों में कहा कि धर्मांतरण दरअसल मानवता की हत्या है। उन्होंने कहा, “संसार में केवल ‘धर्म’ ही मानव जीवन की मूल रचना है, बाकी ईसाइयत और इस्लाम तो पंथ हैं। जब कोई व्यक्ति अपना धर्म छोड़कर दूसरे विचार में जाता है, तो वह मतांतरण है और मतांतरण ही वास्तव में ‘राष्ट्रांतरण’ है। छल-कपट से धर्म बदलने वालों को ढूंढकर हमें उन्हें समझाना होगा और मुख्यधारा में वापस लाना होगा।”

​वहीं अयोध्या से आए संत शंभु देवाचार्य ने कहा कि विश्व में केवल हिंदू धर्म ने कभी किसी का जबरन मतांतरण नहीं कराया। भटके हुए लोगों को पुनः अपनी संस्कृति से जोड़ना समय की मांग है।

घर-घर जाएगी ‘जानकी टोली’, संभालेंगी कमान

​विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने घोषणा की कि सामाजिक कुरीतियों और धर्मांतरण से निपटने के लिए ‘जानकी दल’ का गठन किया गया है। अब गाँवों की महिलाएं सामाजिक नेतृत्व संभालेंगी और ‘जानकी टोली’ घर-घर जाकर सांस्कृतिक अलख जगाएगी।

​कथा व्यास जगद्गुरु बालकदेवाचार्य ने राम-जानकी के राज्याभिषेक का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रामराज्य की परिकल्पना ही भारत का नैतिक बल है। जब हर घर में माता जानकी की पूजा होगी, तब परिवार और समाज बचेगा। अब देश का धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व महिलाओं के हाथ में आ चुका है।

इस अवसर पर ये रहे उपस्थित:

महाकुंभ में नौशाद दुबे, गीतकार विवेक मिश्रा, डॉ. कवीन्द्र नारायण, शैलेंद्र शुक्ला, डॉ. अर्चना भारतवंशी, आभा उपाध्याय, प्रो. पंकज मिश्रा, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. नजमा परवीन, ओबैदुल्लाह दुबे सहित हजारों की संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

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Author: fastblitz24

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