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वर्दी शर्मसार: 6 दिन से अस्पताल में सड़ रही अज्ञात लाश, कीड़े पड़े; सीमा विवाद में उलझी रही जौनपुर पुलिस!

बदलापुर और सिंगरामऊ थाने के ‘चक्कर’ में सिस्टम ने मार दी मानवता; सरकार के ‘दमदार’ दावों की खुली पोल

जौनपुर।

यूपी में ‘दमदार’ कानून-व्यवस्था और ‘हाईटेक’ पुलिसिंग के बड़े-बड़े दावों की हवा निकल चुकी है। खाकी की संवेदनहीनता और घोर लापरवाही का एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंसानियत को तार-तार कर दिया है। जिला अस्पताल के मोर्चरी (लाश घर) में एक अज्ञात व्यक्ति की लाश पिछले 6 दिनों से सड़ रही है। हालत यह है कि शव पूरी तरह गल चुका है और उसमें कीड़े पड़ चुके हैं, लेकिन सूबे की ‘मुस्तैद’ पुलिस सीमा विवाद का बहाना बनाकर चैन की बंसी बजा रही है।

​क्या है पूरा मामला?

​सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीती 13 जून की सुबह सिंगरामऊ थाना क्षेत्र के अंतर्गत वाराणसी-लखनऊ रेल मार्ग पर एक करीब 40 वर्षीय व्यक्ति ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए 108 एंबुलेंस बुलाई और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बदलापुर भिजवाया।

​बदलापुर CHC के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए तत्काल जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बदलापुर थाने के होमगार्ड अशोक कुमार घायल को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। होमगार्ड शव को लाश घर में रखवाकर और चिकित्सक से मेमो लेकर चलता बना। इसके बाद से यह फाइल और लाश, दोनों सिस्टम के ठंडे बस्ते में चली गईं।

​बदबू से महका अस्पताल, पर नहीं जागी खाकी!

हद दर्जे की लापरवाही: नियम के मुताबिक शव मिलने के 72 घंटे के भीतर शिनाख्त और पोस्टमार्टम की कार्रवाई हो जानी चाहिए। लेकिन यहाँ 6 दिन (144 घंटे) बीत जाने के बाद भी किसी पुलिसकर्मी ने मुड़कर देखना मुनासिब नहीं समझा। नतीजा यह है कि आज वह लाश पूरी तरह गल चुकी है और अस्पताल परिसर में बदबू फैल रही है।

 

​’तेजतर्रार’ पुलिस का असली चेहरा: सीमा विवाद या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना?

​अब सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह उठता है कि आखिर इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?

  • सिंगरामऊ थाना या GRP हरपालगंज?: घटना सिंगरामऊ थाना क्षेत्र या जीआरपी हरपालगंज के दायरे की बताई जा रही है।
  • बदलापुर पुलिस की चुप्पी: जब बदलापुर थाने का होमगार्ड शव लेकर पहुंचा था, तो थाने ने आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्र को सूचित क्यों नहीं किया?

​क्या इसे सिर्फ थानों का सीमा विवाद मानकर छोड़ दिया जाए, या फिर यह खाकी की वो संवेदनहीनता है जिसके लिए ‘लापरवाही’ शब्द भी छोटा पड़ जाए?

​फ़ास्ट ब्लिट्ज का सवाल: कब तक ‘कागजी’ दावों के भरोसे चलेगी व्यवस्था?

​एक तरफ सूबे की सरकार जनता को त्वरित न्याय और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की ‘ताल ठोक’ रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को इस कदर ठेंगे पर रख रहे हैं। अगर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, तो बदलापुर से लेकर सिंगरामऊ और जीआरपी के कई बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय है।

​अब देखना यह है कि इस खबर के बाद कुंभकर्णी नींद में सोए जिम्मेदार जागते हैं या फिर इस लावारिस लाश की तरह ही इस मामले को भी रफा-दफा कर दिया जाता है।

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Author: fastblitz24

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