प्रतापपुर कमैचा ब्लॉक सभागार में पसरा रहा सन्नाटा, जिम्मेदार नहीं दे पाए रजिस्टर में दर्ज शिकायतों का ब्योरा
- जनता का टूट रहा भरोसा या प्रचार-प्रसार में बरती गई लापरवाही? स्थानीय लोगों ने खड़े किए गंभीर सवाल
चांदा/सुलतानपुर।

शासन के निर्देश पर जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए आयोजित होने वाला ‘ब्लॉक दिवस’ अब महज एक सरकारी औपचारिकता बनकर रह गया है। जमीनी हकीकत यह है कि अधिकारी कुर्सियां तोड़ रहे हैं और फरियादी नदारद हैं। ऐसा ही नजारा विकास खंड प्रतापपुर कमैचा के ब्लॉक सभागार में आयोजित ब्लॉक दिवस में देखने को मिला, जहां फरियादियों की भारी अनुपस्थिति ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और दावों की पोल खोलकर रख दी है। खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) निशा तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में एक भी शिकायतकर्ता लिखित शिकायत लेकर नहीं पहुंचा, जिससे पूरा आयोजन सिर्फ कागजी कोरम पूरा करने तक ही सिमट गया।


मौखिक आए, लिखित में ‘सन्नाटा’
जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी निशा तिवारी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कुछ लोग मौखिक रूप से अपनी समस्याएं लेकर आए थे, लेकिन लिखित रूप से एक भी शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। बीडीओ भले ही मौखिक शिकायतों का बहाना बना रही हों, लेकिन ब्लॉक दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में लिखित शिकायतों का शून्य होना यह साफ दर्शाता है कि आम जनता का इस व्यवस्था से या तो विश्वास उठ चुका है या फिर जिम्मेदार अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर इसका प्रचार-प्रसार करना मुनासिब नहीं समझते।
रजिस्टर के सवाल पर ‘बगलें झांकते’ नजर आए जिम्मेदार
ब्लॉक दिवस में पारदर्शिता का आलम यह रहा कि जब वहां मौजूद जिम्मेदार कर्मचारियों से रजिस्टर में दर्ज शिकायतों की संख्या और उनके निस्तारण के संबंध में जानकारी मांगी गई, तो कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दे सका। अधिकारी और कर्मचारी बगलें झांकते नजर आए। रजिस्टर की गोपनीयता और जानकारी देने में आनाकानी से अब यह चर्चा जोरों पर है कि कहीं ब्लॉक दिवस केवल कागजी आंकड़ों को दुरुस्त करने और ‘फोटो सेशन’ तक ही सीमित तो नहीं रह गया है?
जनता में आक्रोश, प्रभावी बनाने की मांग
स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि यदि ब्लॉक दिवस का गांवों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और अधिकारियों द्वारा शिकायतों के निस्तारण में ईमानदारी दिखाई जाए, तो लोग अपनी समस्याएं लेकर जरूर पहुंचेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि जब तक शिकायत निस्तारण प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी नहीं बनाया जाएगा, तब तक सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ आम जनता को नहीं मिल पाएगा। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस लापरवाही पर क्या संज्ञान लेते हैं।
Author: fastblitz24



