Fastblitz 24

अजय कुमार का लेखन केवल साहित्य नहीं, बल्कि एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन

​जौनपुर के जन-इतिहास और साझी संस्कृति के दस्तावेज ‘राग जौनपुरी’ पर हिंदी भवन में आयोजित परिचर्चा में विद्वानों ने साहित्यकार अजय कुमार को किया याद

जौनपुर

कवि, चित्रकार और अनुवादक अजय कुमार की स्मृति में हिंदी भवन में आयोजित ‘राग जौनपुरी’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने उन्हें एक ऐसे ‘जन-इतिहासकार’ के रूप में रेखांकित किया, जिन्होंने अपने शब्दों के माध्यम से जौनपुर की माटी और जनजीवन को अक्षुण्ण बना दिया। जन संस्कृति मंच और हिंदी भवन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अजय कुमार की कालजयी कृति ‘राग जौनपुरी’ पर गहन विमर्श हुआ।

जौनपुर का ‘जन-इतिहास’

सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि अजय कुमार ने जीवन भर जौनपुर को पढ़ा और जिया। उन्होंने कहा, “‘राग जौनपुरी’ किसी एक साहित्यकार की किताब मात्र नहीं, बल्कि यह जनता का इतिहास है। इसमें घर-गाँव की धड़कन और जन-संस्कृति का विकास निहित है।” प्रो. प्रधान ने जोर देकर कहा कि अजय कुमार का लेखन एक वृहत सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसने हिंदी और उर्दू को एक साझा मंच प्रदान किया।

साझी संस्कृति का जीवंत दस्तावेज

वरिष्ठ कवि और जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि यह पुस्तक जौनपुर के शर्की काल से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा का लेखा-जोखा है। उन्होंने इसे जौनपुर की साझी संस्कृति और एकता का एक जीवंत मॉडल बताया। वहीं, इतिहासकार कनिका सिंह ने दिल्ली से ऑनलाइन जुड़ते हुए कहा कि ‘राग जौनपुरी’ आकस्मिक और पॉपुलर इतिहास लेखन की एक अनूठी जुगलबंदी है, जिसमें आलोचनात्मक विवेक और सामाजिक जटिलताओं को पूरी ईमानदारी से दर्ज किया गया है।

साहित्य में ‘रंगीन सादगी’ का संगम

आईपीएस अधिकारी और लेखक अमित श्रीवास्तव ने जौनपुर की विद्वता को ‘रंगीन सादगी’ करार दिया और कहा कि अजय कुमार के लेखन में यह सादगी स्पष्ट रूप से झलकती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रणय कृष्ण ने अजय कुमार की तुलना एक ऐसे वटवृक्ष से की, जिसने जौनपुर की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का कार्य किया है। पत्रकार प्रभात कुमार ने किताब की बोलचाल की भाषा और लोकसंगीत के प्रति लेखक के गहरे लगाव की सराहना की।

दुनिया साधारण लोगों से बनी है

ट्रेड यूनियन नेता वी.के. सिंह ने अजय कुमार को ‘सूफी मिजाज’ का बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यों से यह संदेश दिया कि यह दुनिया साधारण लोगों के परिश्रम से टिकी है। वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने कहा कि इस पुस्तक ने सदियों की दास्तान को एक सूत्र में पिरो दिया है। सत्र का संचालन समकालीन जनमत के संपादक के.के. पांडेय ने किया, जबकि युवा कवि आलोक श्रीवास्तव ने पुस्तक के वैचारिक आधार पर प्रकाश डाला।

शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन हुआ, जिसका संचालन वरिष्ठ कवि धीरेन्द्र पटेल ने किया। इसमें लखनऊ, इलाहाबाद और वाराणसी समेत जौनपुर के कवियों और शायरों ने अजय कुमार को अपनी काव्य-श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कौशल किशोर, अहमद निसार, इबरत मछलीशहरी, रूपम मिश्र, प्रतिमा मौर्य, आलम ग़ाज़ीपुरी, विभा तिवारी और प्रमोद वाचस्पति सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

fastblitz24
Author: fastblitz24

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज