गलाकाट डिस्काउंट की होड़ और दोहरे रेट के चक्रव्यूह में फंसा खुदरा दवा कारोबारी
चंद नेताओं की चमकती सियासत के बीच बेमौत मर रहा छोटा व्यापारी
हड़ताल समाधान नहीं… नीतिगत बदलाव ही एकमात्र विकल्प
(विशेष विश्लेषण)

जौनपुर।


आगामी 20 मई 2026 को अखिल भारतीय केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट संगठन (AIOCD) के आह्वान पर एक बार फिर ‘ऑनलाइन फार्मेसी’ के खिलाफ राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद की बिसात बिछाई जा रही है. लेकिन इस बार देश के 12 लाख 50 हजार केमिस्ट आंख बंद करके इस रास्ते पर चलने को तैयार नहीं हैं. जनपद के अग्रणी प्रगतिशील संगठन ‘केमिस्ट एंड फार्मेसी वेलफेयर एसोसिएशन, जौनपुर’ ने इस हड़ताल के खोखलेपन को उजागर करते हुए इसका खुलकर विरोध किया है.
सवाल सीधा है—जब बीमारी जड़ों में है, तो पत्तों पर दवा छिड़कने का स्वांग क्यों रचा जा रहा है? हरिभूमि के इस विशेष विश्लेषण में जानिए कि आखिर क्यों यह हड़ताल छोटे व्यापारियों के लिए आत्मघाती साबित होने वाली है.

पर्दाफाश: 10 साल बाद जागा ‘नेतृत्व’, विसंगतियों की भरमार
- विशाल वृक्ष बन चुका है ऑनलाइन व्यापार: ऑनलाइन फार्मेसी को भारत के बाजार में पैर पसारे एक दशक (10 साल) बीत चुका है. जब इसकी जड़ें कमजोर थीं, तब आज के कथित रहनुमा खामोश बैठे रहे. आज जब इसमें देश के दिग्गज कॉर्पोरेट घराने और रसूखदार राजनेता सीधे तौर पर शामिल हो चुके हैं, तब एक दिन की ‘सांकेतिक बंदी’ से उन पर क्या असर पड़ेगा?
- जन औषधि और नर्सिंग होम को ‘अभयदान’ क्यों?: इस प्रस्तावित हड़ताल की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिले भर के तमाम नर्सिंग होम में संचालित दवा की दुकानों और जन औषधि केंद्रों को इस बंदी से बाहर रखा गया है. क्या ये प्रतिष्ठान ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1945 के दायरे से बाहर हैं? जब पड़ोस का नर्सिंग होम और सरकारी केंद्रों की दुकानें खुली रहेंगी, तो मरीज वहां जाएगा. नतीजा, खुदरा केमिस्ट अपनी दुकान बंद कर हजारों रुपए का व्यापारिक घाटा, स्टाफ का वेतन और किराया अपनी जेब से भरेगा और अपने स्थाई ग्राहक को हमेशा के लिए दूसरों के पाले में धकेल देगा.
अंदरूनी खोखलापन: ‘सप्लाई का दोहरा रेट’ और साख पर बट्टा
दवा व्यापार आज ऑनलाइन से सिर्फ 10 से 12 प्रतिशत ही प्रभावित है, लेकिन आंतरिक विसंगतियों ने इसे 60 प्रतिशत से ज्यादा की चोट पहुंचाई है:
- कंपनियों का दोहरा खेल: दवा निर्माता कंपनियां ऑनलाइन एजेंसियों और बड़े नर्सिंग होम को ‘अप्रूवल सेल’ या विशेष स्कीम के तहत 30% से 40% (कहीं-कहीं 50% तक) कम रेट पर माल की सीधी आपूर्ति कर रही हैं. इसी भारी मार्जिन के दम पर ऑनलाइन एजेंसियां और नर्सिंग होम बेधड़क भारी डिस्काउंट बांट रहे हैं. सवाल यह है कि एक ही बाजार में सप्लाई के दो रेट क्यों चल रहे हैं? बड़े संगठनों के नुमाइंदे दवा कंपनियों (IDMA और OPPI) के इस पक्षपात के खिलाफ मौन क्यों रहते हैं?
- 1999 के एग्रीमेंट का वो ‘काला’ सच: 17 जनवरी 1999 को एक समझौते के तहत एक्सपायरी-ब्रेकेज के आधार पर खुदरा व्यापारियों के हितों को दवा कंपनियों के पास गिरवी रख दिया गया, जिसके कारण आज एक्सपायरी का सीधा आर्थिक नुकसान छोटे व्यापारियों को खुद भुगतना पड़ता है.
गलाकाट कंपटीशन और मुनाफे का घटता ग्राफ
आज की सबसे बड़ी कड़वी हकीकत ‘गलाकाट कंपटीशन’ और ‘डिस्काउंट की होड़’ है. गली-मोहल्लों में दवाओं पर भारी छूट के विज्ञापन और बोर्ड लगाना इस सम्मानजनक व्यवसाय की साख को मिट्टी में मिला रहा है. होलसेलर और रिटेलर दोनों ही इस अंधी दौड़ में अपना और अपने कर्मचारियों का भविष्य भूलते जा रहे हैं. वे यह भी नहीं देख पा रहे हैं कि मुनाफे का रेशियो (Ratio) घटते-घटते अब किस निचले स्तर पर आ चुका है. नेतागिरी चमकाने वाले इन बुनियादी मुद्दों पर बात करने से बचते हैं.
फ़ास्ट ब्लिट्ज नजरिया: हड़ताल नहीं, नीतिगत सुधार है स्थायी समाधान (The Way Forward)
भावनाओं में बहकर दुकानें बंद करना समाधान नहीं, बल्कि अपने ही व्यवसाय को चोट पहुंचाना है. यदि दवा व्यापार को वाकई जिंदा रखना है, तो सरकार और प्रशासन के सामने ये 4 नीतिगत मांगें मजबूती से रखनी होंगी:
- ‘समान मूल्य, समान नीति’ (One Rate, One Nation): जो दवा जिस रेट पर ऑनलाइन कंपनियों या बड़े नर्सिंग होम को सप्लाई की जा रही है, उसी रेट पर देश के हर छोटे-बड़े खुदरा केमिस्ट को भी मिलनी चाहिए. सप्लाई चेन का यह भेदभाव तुरंत खत्म हो.
- डिस्काउंट के बोर्ड हटाने के साथ ‘रेट कंट्रोल’ (DPCO): सभी आवश्यक दवाओं को पूरी तरह से रेट कंट्रोल के दायरे में लाया जाए ताकि कीमतों में पारदर्शिता आए. केमिस्ट भी दवा को सामान्य और तय मूल्य पर ही बेचें. दवा व्यवसाय में डिस्काउंट की होड़ व्यक्तिगत सम्मान को आहत करने वाली है, इसे बंद होना चाहिए.
- निश्चित और सम्मानजनक लाभांश (Fixed Margin): खुदरा दवा विक्रेताओं के लिए एक सम्मानजनक और सुरक्षित मार्जिन तय किया जाए, जिससे अनैतिक और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो सके.
- कानूनी और संगठित लड़ाई: ऑनलाइन फार्मेसियों द्वारा ड्रग एक्ट के नियमों के उल्लंघन (जैसे बिना वैध पर्चे के दवा देना) के खिलाफ कोर्ट और ड्रग कंट्रोलर के स्तर पर प्रशासनिक लड़ाई लड़ी जाए, न कि सड़कों पर तालाबंदी करके जनता को परेशान किया जाए.
केमिस्ट एंड फार्मेसी वेलफेयर एसोसिएशन ने 20मई की प्रस्तावित हड़ताल को जन-विरोधी होने के साथ-साथ खुद दवा व्यापारियों के लिए अहित में है। . अपने परिवार, अपने स्टाफ और मरीजों के हितों को देखते हुए विवेकपूर्ण निर्णय लें और 20 मई 2026 को अपने-अपने प्रतिष्ठान पूर्व की भांति खुले रखें.
Author: fastblitz24



