दावों में ‘नो एंट्री’, सड़कों पर हाहाकार; क्या कागजी रस्म अदायगी बनकर रह गई प्रशासन की ‘कड़क’ सुरक्षा व्यवस्था?
जौनपुर।

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को लेकर जौनपुर जिला प्रशासन के सुचारू व्यवस्था और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पहले ही दिन हवा निकल गई। प्रशासन ने ढिंढोरा पीटा था कि 8, 9 और 10 जून को शहर में सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक भारी वाहनों की ‘नो एंट्री’ रहेगी। दावा था कि 21 केंद्रों पर परीक्षा दे रहे 56,880 अभ्यर्थियों को कोई दिक्कत नहीं होगी और कानून व्यवस्था चाक-चौबंद रहेगी। लेकिन हकीकत की जमीन पर उतरते ही इन दावों का जनाजा निकल गया!


पहली ही पाली में ‘कबाड़ा’: तमाशबीन बना रहा सिस्टम!
सोमवार को जैसे ही पहली पाली (सुबह 10:00 से दोपहर 12:00 बजे) की परीक्षा खत्म हुई और अभ्यर्थी केंद्रों से बाहर निकले, पूरा शहर एक झटके में बंधक बन गया। नगर के जिला चिकित्सालय के समीप बनाए गए परीक्षा केंद्र के बाहर का नजारा तो प्रशासनिक नाकामी का सबसे बड़ा सुबूत बन गया।
सड़कें पूरी तरह से चोक हो गईं। परीक्षा देने आए अभ्यर्थियों के वाहनों और सड़क पर चलने वाले आम राहगीरों के वाहनों के चलते ऐसा विकराल जाम लगा कि अमर शहीद उमानाथ सिंह जिला चिकित्सालय के सामने से लेकर सीतापुर आंख अस्पताल तक गाड़ियां रेंगने को मजबूर हो गईं। दोनों तरफ से सैकड़ों वाहन इस महाजाम में फंस गए और जनता त्राहि-त्राहि कर उठी।
दिल दहला देने वाला मंजर: जिंदगी और मौत के बीच फंसी रही एम्बुलेंस!
इस महाजाम का सबसे खौफनाक और असंवेदनशील चेहरा तब सामने आया, जब जिला चिकित्सालय से एक सीरियस मरीज को लेकर निकली एम्बुलेंस भी इस अराजकता के बीच फंस गई। एम्बुलेंस का सायरन चीखता रहा, जिंदगी और मौत की जंग सड़क पर लड़ती रही, लेकिन जाम टस से मस नहीं हुआ।
कहां सोती रही 1200 पुलिसकर्मियों की फौज?
बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन जिस 1200 पुलिस कर्मियों, 21 सेक्टर मजिस्ट्रेट और 21 स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती का दम भर रहा था, वे इस संकट के समय कहां गायब थे? जब जिला अस्पताल के सामने एम्बुलेंस जिंदगी के लिए जूझ रही थी, तब मौके पर इस महाजाम को नियंत्रित करने के लिए एक भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आया!
क्या खाकी सिर्फ वीआईपी ड्यूटी और कागजी आंकड़ों के लिए है? परीक्षा शांतिपूर्ण कराने का मतलब सिर्फ केंद्र के अंदर की सुरक्षा नहीं, बल्कि बाहर की सड़कों को सुचारू रखना भी है, जिसमें जौनपुर प्रशासन पहले ही दिन पूरी तरह ‘फेल’ साबित हुआ है।
जागिए हुक्मरान! अभी दो दिन और बाकी हैं
फास्ट ब्लिट्ज 24 जिला प्रशासन से सीधा सवाल करता है कि आखिर इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? अगर आने वाले दो दिनों (9 और 10 जून) में भी यही आलम रहा, तो परीक्षा देने आए युवाओं और इलाज के लिए तड़पते मरीजों का भगवान ही मालिक है। प्रशासन को तुरंत अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा और परीक्षा केंद्रों के बाहर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर पर्याप्त और मुस्तैद व्यवस्था करनी होगी!
Author: fastblitz24



