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आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे ड्रग माफिया; राज्यसभा में गूंजी ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता प्राधिकरण’ की मांग

​ *खतरे की घंटी:* 20 राज्यों में CDSCO के टेस्ट में 10% से अधिक दवाएं फेल, पैरासिटामोल में भी मिलावट का अंदेशा।

​ *सांसद का बड़ा खुलासा* : हिमाचल और उत्तराखंड की छोटी इकाइयां बनीं घटिया दवाओं का केंद्र; 36% संदिग्ध कारखानों पर लगा ताला।

​ *चेतावनी* : बिना डॉक्टर की पर्ची ‘टॉफी-चॉकलेट’ की तरह एंटीबायोटिक लेना पड़ रहा भारी; देश में हर साल 3 लाख मौतें।

​नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो: देश में गुणवत्ताहीन और नकली दवाओं के बढ़ते कारोबार पर गहरी चिंता जताते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने सरकार से एक सख्त और केंद्रीयकृत नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की है। शुक्रवार को राज्यसभा में ‘शून्य काल’ के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि सामान्य बुखार में ली जाने वाली पैरासिटामोल जैसी दवाएं भी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के परीक्षणों में विफल रही हैं।
​203 कंपनियां बेच रही थीं घटिया दवाएं
​सांसद साहनी ने सदन को बताया कि पिछले वर्ष की जांच में 203 फार्मास्युटिकल कंपनियां घटिया और मिलावटी दवाएं बेचती पाई गई थीं। चौंकाने वाली बात यह है कि निरीक्षण किए गए कारखानों में से 36 प्रतिशत गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद उन्हें बंद करना पड़ा। CDSCO द्वारा 20 राज्यों में किए गए नमूनों की जांच में पाया गया कि बाजार में उपलब्ध दवाओं में से 10 प्रतिशत से अधिक दवाएं मानक स्तर से नीचे हैं।

​हिमाचल और उत्तराखंड बने ‘हब’
​साहनी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि घटिया दवाएं बनाने वाली अधिकांश कंपनियां हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लघु एवं मध्यम क्षेत्र (MSME) से जुड़ी हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “पिछले वर्ष ड्रग कंट्रोलर ने 1,500 से अधिक नमूने जब्त किए थे, जिनमें से कुछ में चाक पाउडर जैसी जानलेवा सामग्रियां मिली थीं। खांसी की दवाई (Cough Syrup) के कारण बच्चों की मौत की घटनाएं देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा रही हैं।”
​बिना पर्ची एंटीबायोटिक का खतरा
​सांसद ने एक डराने वाला आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि देश में हर साल लगभग तीन लाख लोगों की मृत्यु केवल इसलिए हो जाती है क्योंकि वे वायरल बुखार में बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करते हैं। उन्होंने कहा कि आज एंटीबायोटिक्स ‘टॉफी-चॉकलेट’ की तरह दुकानों पर उपलब्ध हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
​’नेशनल फार्मास्युटिकल क्वालिटी अथॉरिटी’ की मांग
​साहनी ने मांग की कि देशभर में विनिर्माण और बिक्री केंद्रों पर एक समान मानक सुनिश्चित करने के लिए ‘राष्ट्रीय औषधि गुणवत्ता प्राधिकरण’ (National Pharmaceutical Quality Authority) का गठन किया जाए। उन्होंने औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act) के तहत नियमों को और कड़ा करने तथा CDSCO के आधुनिकीकरण पर जोर दिया ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली कंपनियों पर लगाम कसी जा सके।

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Author: fastblitz24

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