बथुआपार में हुई बैठक में किसानों ने दोहराया – “जान दे देंगे, ज़मीन नहीं देंगे”

आजमगढ़ : बथुआपार में आज एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें एयरपोर्ट के नाम पर किसानों की ज़मीन छीनने की लगातार हो रही कोशिशों पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। किसानों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि इस ज़मीन के असली मालिक किसान हैं, और यह देश किसानों का है। जिस तरह से पिछले दिनों ज़मीन अधिग्रहण की खबरें सामने आईं, उससे किसान डरने वाले नहीं हैं, बल्कि वे अपनी ज़मीन बचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।


बैठक में मांग की गई कि जो कर्मचारी और अधिकारी ज़मीन सर्वे के बारे में बयान जारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार, ग्रामीणों से बातचीत और ज़मीनी सर्वे के बिना जिस तरह से कभी ‘दो नक्शे’ तो कभी ‘छह गांव इधर और छह गांव उधर’ जाने की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, अगर इन अफवाहों से किसी ग्रामीण के जीवन पर कोई संकट आता है, तो उसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी।
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किसानों ने अक्टूबर 2022 में पुलिस बल के प्रयोग से सर्वे करने की कोशिश और जनवरी 2023 में जिलाधिकारी आजमगढ़ द्वारा परियोजना स्थगित करने की बात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब ग्रामीणों ने लिखित में आश्वासन मांगा, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि उनके पास लिखित आदेश नहीं है। लोकसभा में सांसद दरोगा प्रसाद सरोज के सवाल के जवाब में भारत सरकार के मंत्री ने यह भी कहा था कि उनके पास मंदुरी एयरपोर्ट का कोई प्रस्ताव नहीं है। ऐसे में किसानों का मानना है कि जिलाधिकारी समेत सभी प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।
हालांकि, एयरपोर्ट विस्तारीकरण की खबरें फिर से सामने आने के बाद, किसानों ने सरकार से पूछा है कि इस विस्तारीकरण की मांग आखिर किसने की है। किसानों का कहना है कि सच्चाई यह है कि आजमगढ़ समेत पूरे देश का किसान अपनी ज़मीन नहीं देना चाहता है, और किसानों की सहमति के बिना ज़मीन नहीं ली जा सकती।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताए जाने पर किसानों ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की महत्वाकांक्षा ही सरकार की महत्वाकांक्षा होती है। राज्यसभा, लोकसभा और उत्तर प्रदेश विधानसभा में जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों के पक्ष में सवाल उठाए हैं। ऐसे में किसान मांग करते हैं कि सरकार किसी भी तरह के विस्तारीकरण की योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश न करे, क्योंकि किसान अपनी ज़मीन नहीं देंगे। उनका संकल्प स्पष्ट है: “जान दे देंगे, ज़मीन नहीं देंगे।”
किसान एकता समिति द्वारा आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता विनोद कुमार यादव ने की और इसका संचालन महेंद्र यादव ने किया। बैठक को रामसम्हार प्रजापति, प्रकाश रंजन राय, सुभाष यादव, साहबलाल, दिनेश यादव, नंदलाल, उपेंद्रनाथ, रमायन, हरेंद्र, महादेव यादव और किसान नेता राजीव यादव ने संबोधित किया।
इस मौके पर बलिराम, विनोद यादव, कैलाश यादव, सहबदीन, अवधेश यादव, वीरेंद्र विश्वकर्मा, सुरेश यादव और गांव के अन्य किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
Author: fastblitz24



