– सरकार की शह पर फल-फूल रहे ‘लूट के ठिकाने’, सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखा रहे कोचिंग संचालक

- बदलापुर में एआईडीएसओ ने दी श्रद्धांजलि, शिक्षा के निजीकरण और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ खोला मोर्चा
(विशेष सवाददाता)

बदलापुर (जौनपुर)। क्या देश का भविष्य कहे जाने वाले होनहार छात्र अब शिक्षा के नाम पर चल रहे ‘मौत के कुओं’ में अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं? लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में भड़की भीषण आग ने 15 बेकसूर छात्रों और कई नीट (NEET) अभ्यर्थियों को जिंदा लील लिया। इस ह्रदय विदारक हादसे ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की नींद और कोचिंग माफियाओं की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है। इस वीभत्स अग्निकांड को लेकर जौनपुर के बदलापुर में छात्र-छात्राओं और अभिभावकों का गुस्सा उबल पड़ा।


ऑल इण्डिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO) के बैनर तले मंगलवार को बदलापुर की सब्जी मंडी के पास एक भावुक और आक्रोशित श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ बनाई गई प्रतीकात्मक वेदी पर नम आंखों से मृत छात्रों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर हुंकार भरी गई।
निजीकरण की आड़ में ‘लूट की खुली छूट’
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए एआईडीएसओ के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव दिलीप कुमार ने इस अग्निकांड पर गहरा शोक और विक्षोभ व्यक्त किया। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार और पूंजीपतियों के गठजोड़ पर निशाना साधते हुए कहा, “यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और मुनाफे की अंधी दौड़ का नतीजा है। सरकार जानबूझकर सरकारी शिक्षण संस्थानों को पंगु बना रही है ताकि निजीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर कोचिंग संस्थानों को छात्रों से मोटी रकम वसूलने और उनके जीवन से खेलने की खुली छूट दे दी गई है।”
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे सरकार
छात्र संगठन ने मांग की है कि अगर ऐसी दर्दनाक घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाना है, तो सरकार को शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी सुधार करने होंगे। निजीकरण की नीतियों पर तुरंत रोक लगाकर सरकारी स्कूल-कॉलेजों के ढांचे को मजबूत करना होगा और रिक्त पड़े पदों पर बेरोजगार युवाओं की स्थाई भर्ती करनी होगी।
संगठन ने पुरजोर तरीके से उठाई ये मांगें:
- दोषियों को फांसी जैसी सजा: अग्निकांड के लिए जिम्मेदार कोचिंग संचालकों और भ्रष्ट अधिकारियों को चिन्हित कर कठोरतम सजा दी जाए।
- मुआवजा और मुफ्त इलाज: मृतक छात्रों के परिजनों को भारी मुआवजा मिले और घायल छात्रों को उच्च स्तरीय मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जाए।
- उच्च स्तरीय जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो ताकि सच सामने आ सके।
- सुरक्षा ऑडिट: देश और प्रदेश के तमाम कोचिंग सेंटरों का तुरंत कड़ा सुरक्षा ऑडिट हो।
इस विरोध और श्रद्धांजलि सभा में एआईडीएसओ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सचिन जैन, प्रवीण विश्वकर्मा, अंजली सरोज, पूनम प्रजापति, विकास मौर्य, जयंत राव, विजयप्रकाश, वर्षा और अजय मौर्य सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं व अभिभावक मौजूद रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संतोष कुमार प्रजापति ने किया। अब सवाल यह है कि क्या इस चीख-पुकार के बाद भी प्रशासन जागेगा या फिर किसी अगले हादसे का इंतजार करेगा?
Author: fastblitz24


