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ईरान पर हमले से भारत की बढ़ सकती है परेशानी

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान पर परमाणु समझौता करने के लिए सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान पर अमेरिका की ऐसी कार्रवाई का उल्टा असर हो सकता है। इससे मध्य पूर्व में नई अस्थिरता पैदा हो सकती है, जिसकी चपेट में कई देश आ सकते हैं। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए पहले ही बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है। इनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर, लड़ाकू विमान, एरियल रिफ्यूलिंग प्लेन और रिकॉनसेंस एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इस तैनाती से ट्रंप को ईरान के खिलाफ लिमिटेड या लंबे ऑपरेशन शुरू करने का ऑप्शन मिल गया है।

ईरान पर करीबी नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत के बीच देश पर बमबारी से परमाणु डील पटरी से उतर सकती है। इससे बदले की कार्रवाई का एक खतरनाक सिलसिला भी शुरू हो सकता है। इलाके के एक सीनियर सरकारी अधिकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान शायद बातचीत में हिस्सा लेना रोक देगा। इससे अमेरिका के लिए ईरान पर दबाव बनाना और मुश्किल हो जाएगा।

अमेरिका और इजरायल ने जून 2025 में ईरान के परमाणु सुविधाओं और एयर डिफेंस पर बड़े पैमाने पर बमबारी की थी। उस समय ट्रंप ने कहा था कि ईरान की जरूरी न्यूक्लियर एनरिचमेंट फैसिलिटी को पूरा तरह तबाह कर दिया गया है। तब ऐसी उम्मीद जताई गई थी कि ईरान को दोबारा अपने परमाणु कार्यक्रम को पटरी पर लाने में कम से कम 5 साल का वक्त लगेगा, लेकिन चंद महीने के अंदर ईरान ने फिर से दिखा दिया है कि वह इस बमबारी से पूरी तरह उबर चुका है।

ईरान पर हमला होता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलेगा। ईरान ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला होता है तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई रूट होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। भारत के कच्चे तेल का लगभग आधा और प्राकृतिक गैस का 60% आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यह समुद्री मार्ग बंद होता है तो भारत के लिए ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इससे न सिर्फ भारत में तेल और गैस का दाम बढ़ेगा, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेबों पर होगा। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी।

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Author: fastblitz24

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