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जौनपुर पुलिस : एक ओर 1015 वाहनों पर ‘हंटर’, दूसरी ओर मनमानी पर हाईकोर्ट का ‘चाबुक’

 

  • 1015 वाहन: नियमों के उल्लंघन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई।​

    10,000 जुर्माना: केराकत के दरोगा सुनील कुमार पर हाईकोर्ट का डंडा।

    वेतन से कटौती: यूपी पुलिस के लिए नजीर बना अदालत का यह आदेश।

जौनपुर

          जनपद में कानून का इकबाल बुलंद करने के लिए जौनपुर पुलिस इन दिनों दोहरे मोर्चे पर खड़ी नजर आ रही है। एक ओर जहाँ पुलिस की ‘तीसरी आंख’ और सख्त चेकिंग अभियान के जरिए नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 1015 वाहन चालकों पर भारी जुर्माना ठोंका गया है, वहीं दूसरी ओर वर्दी की हनक में आम आदमी का उत्पीड़न करने वाले एक दरोगा पर माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा आर्थिक दंड लगाकर विभाग को आईना दिखाया है।

अभियान: सड़क पर उतरी पुलिस, 1015 चालानों से मचा हड़कंप

​वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कुंवर अनुपम सिंह के निर्देश पर जनपद के सभी थाना क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस ने सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 1015 वाहनों का चालान काटकर उनसे जुर्माना वसूला गया।


  • अपराध नियंत्रण पर फोकस: पुलिस टीमों ने न केवल बिना हेलमेट, तीन सवारी और बिना सीट बेल्ट वाले चालकों को पकड़ा, बल्कि संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की गहन तलाशी भी ली।

  • सुरक्षा का संदेश: एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जनपद में शांति व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रहेंगे। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का पालन कर पुलिस का सहयोग करें।

न्याय की मार: दरोगा की जेब से कटेगा 10 हजार का हर्जाना

​एक तरफ जहाँ पुलिस नियमों का पाठ पढ़ा रही है, वहीं केराकत थाने के तत्कालीन उप-निरीक्षक (SI) सुनील कुमार को अपनी शक्तियों का दुरुपयोग महंगा पड़ गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में दरोगा के वेतन से 10,000 रुपये काटकर याचिकाकर्ता को देने का आदेश दिया है।

  1. क्या था मामला: केराकत के दुगौली निवासी सुधांशु का ऑटो रिक्शा (UP 62 BT 5203) पुलिस ने जुलाई 2025 में ‘लावारिस’ बताकर जब्त किया था। पीड़ित महीनों तक थाने के चक्कर काटता रहा, लेकिन वैध कागजात होने के बावजूद गाड़ी नहीं छोड़ी गई।
  2. कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की अदालत ने पुलिस के ‘अजीबोगरीब’ तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी कानूनी आधार के नागरिक की संपत्ति पर कब्जा करना शक्तियों का खुला दुरुपयोग है
  3. अनुशासन और अधिकार के बीच की लकीर

​जौनपुर की ये दो घटनाएं पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा सबक हैं। जहाँ 1000 से अधिक चालान यह दर्शाते हैं कि नियम तोड़ने वालों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है, वहीं हाईकोर्ट की कार्रवाई यह याद दिलाती है कि वर्दी पहनकर मनमानी करने वालों को भी बख्शा नहीं जाएगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी यदि किसी अधिकारी ने जनता को अनावश्यक परेशान किया, तो हर्जाना विभाग नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी की जेब से ही भरा जाएगा।

  • 1015 वाहन: नियमों के उल्लंघन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई।
  • 10,000 जुर्माना: केराकत के दरोगा सुनील कुमार पर हाईकोर्ट का डंडा।
  • वेतन से कटौती: यूपी पुलिस के लिए नजीर बना अदालत का यह आदेश
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Author: fastblitz24

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