काउंसलिंग और संवाद के जरिए सुलझे पारिवारिक विवाद; पुलिस ने निभाई मध्यस्थ की सकारात्मक भूमिका

जौनपुर:

घरेलू कलह और कड़वाहट के कारण बिखरने की कगार पर खड़े तीन परिवारों के लिए जौनपुर पुलिस का ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ संजीवनी साबित हुआ। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन द्वारा आयोजित इस अनूठे कार्यक्रम में पुलिस ने केवल कानून के रक्षक की ही नहीं, बल्कि एक सेतु की भूमिका निभाते हुए तीन परिवारों को पुनः एक सूत्र में पिरो दिया है।


विवादों के दलदल से बाहर निकले परिवार
उत्तर प्रदेश सरकार के ‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं की गरिमा को सुरक्षित करना और पारिवारिक विघटन को रोकना है। अक्सर तुच्छ समझे जाने वाले आपसी मनमुटाव जब कानूनी लड़ाई और अलगाव का रूप ले लेते हैं, तब जौनपुर पुलिस की यह पहल एक प्रभावी ‘डिफ्यूजिंग मैकेनिज्म’ (तनाव कम करने की प्रक्रिया) के रूप में सामने आई है।
काउंसलिंग: पुलिस का नया सामाजिक आयाम
सम्मेलन के दौरान, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की टीम ने विशेषज्ञों और अनुभवी काउंसलरों के साथ मिलकर उन परिवारों की काउंसलिंग की जो लंबे समय से आपसी विवाद में उलझे थे। रिपोर्ट के अनुसार:
- संवाद पर जोर: काउंसलरों ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर उनके संशयों को दूर किया।
- सकारात्मक मध्यस्थता: कड़वाहट को भुलाकर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया गया।
- सफल मिलन: अथक प्रयासों के बाद, 03 परिवार अपने पुराने मतभेदों को त्यागकर पुनः एक साथ रहने के लिए राजी हो गए।
भविष्य की सुरक्षा का संकल्प
सहमति बनने के उपरांत, प्रभारी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की अगुवाई में एक भावुक वातावरण के बीच इन परिवारों की विदाई कराई गई। पुलिस प्रशासन ने न केवल उन्हें कानूनी सहायता का आश्वासन दिया, बल्कि एक सुखी और सुरक्षित भविष्य के लिए शुभकामनाएँ भी दीं।
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मंच और सकारात्मक मध्यस्थता मिले, तो समाज की आधारभूत इकाई ‘परिवार’ को बिखरने से रोका जा सकता है। जौनपुर पुलिस का यह प्रयास न केवल अपराध को कम करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि पारिवारिक सौहार्द की बहाली का एक सफल प्रयोग भी है।
Author: fastblitz24


