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जौनपुर का ‘दूल्हा हत्याकांड’ अब सियासी अखाड़ा: धरने पर बैठे VIP पार्टी के जिलाध्यक्ष को घसीट ले गई पुलिस; लाइन बाजार थाने में हलचल तेज

न्याय की मांग पर भारी पड़ी राजनीति; प्रशासन पर दबाव बनाने वाले इंद्रजीत निषाद की गिरफ्तारी, बैकफुट पर खाकी!

अपराध से ज्यादा गूंजने लगी सियासत, खाकी की कार्रवाई से भड़का आक्रोश

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित ‘दूल्हा हत्याकांड’ में आज उस समय बेहद नाटकीय और आक्रामक मोड़ आ गया, जब पीड़िता सौम्या के समर्थन में धरने पर बैठे विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत निषाद को लाइन बाजार पुलिस जबरन अपने साथ थाने ले गई। पुलिस की इस दमनकारी कार्रवाई के बाद धरना स्थल से लेकर पूरे जिले में भारी  हलचल पैदा हो गई है। इंसाफ की चौखट पर शुरू हुआ यह मामला अब सीधे तौर पर योगी सरकार की कानून-व्यवस्था को चुनौती देता हुआ राजनीतिक दंगल बन चुका है।

दबाव बढ़ा तो पुलिस ने अपनाई सख्ती, प्रदेश भर में चर्चा तेज

​धरने के दौरान वीआईपी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत निषाद ने स्थानीय प्रशासन और पुलिसिया सुस्ती पर तीखे प्रहार किए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ा दिया था। उनके कई आक्रामक सार्वजनिक बयानों ने मीडिया का ध्यान इस कदर खींचा कि जौनपुर की यह वारदात अब पूरे उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में मुख्य विमर्श बन गई है। इसी दबाव से बौखलाई पुलिस ने आखिरकार आंदोलन की आवाज को दबाने के लिए इंद्रजीत निषाद को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद चर्चाओं और विरोध का दौर और तेज हो गया है।

विश्लेषण: जब ‘न्याय’ की लड़ाई को निगलने लगती है ‘राजनीति’

​इस पूरे सनसनीखेज प्रकरण का सबसे स्याह और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक खौफनाक आपराधिक घटना अब धीरे-धीरे विशुद्ध राजनीतिक नफे-नुकसान में तब्दील हो गई है।

  • एक तरफ आंसू, दूसरी तरफ एजेंडा: जहां एक ओर उजड़े सिंदूर के साथ पीड़ित परिवार सिर्फ और सिर्फ हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए तड़प रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस संवेदनशील मुद्दे को अपने-अपने चश्मे और वोटों के दृष्टिकोण से भुनाने में लग गए हैं।
  • सवालों के घेरे में सिस्टम: राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि ‘दूल्हा हत्याकांड’ ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की जमीनी हकीकत, अपराध नियंत्रण के दावों, पीड़ित परिवारों को मिलने वाले त्वरित न्याय और खाकी के काम में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे कई गंभीर और कड़वे सवालों को जनता की अदालत में लाकर खड़ा कर दिया है।
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Author: fastblitz24

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