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जौनपुर के ‘भाला-वीर’ का भुवनेश्वर में धमाका: 87.05 मीटर के थ्रो से मचाई सनसनी, एशियन गेम्स में अब रोहित की दहाड़

किसान के बेटे ने साबित किया: सुविधाओं के मोहताज नहीं, इरादों के फौलाद होते हैं खिलाड़ी!

​           जौनपुर। “तू है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए…” यह पंक्तियाँ जब एक किसान पिता ने अपने बेटे से कही होंगी, तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं रहा होगा कि एक दिन उनका बेटा जौनपुर की माटी का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेगा।

​मछलीशहर के दभिया गांव के रोहित यादव ने भुवनेश्वर में आयोजित ‘अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026’ में जो किया है, वह किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 87.05 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर गोल्ड पर कब्जा जमाया और एशियन गेम्स का टिकट पक्का कर लिया।

बांस के भाले से ओलंपिक का सपना

​संघर्ष की भट्टी में तपा है यह ‘गोल्डन बॉय’। जब रोहित के पास खेलने के लिए आधुनिक भाला खरीदने को पैसे नहीं थे, तब पिता सभाजीत यादव ने घर के पास से बांस काटे और उन्हीं से ‘भाले’ तैयार कर दिए। 12 साल पहले शुरू हुआ वह सफर खेतों की मेड़ों से होता हुआ आज भुवनेश्वर के ट्रैक तक पहुँचा है।

नीरज चोपड़ा के साथ अब जौनपुर की चुनौती

​एशियन गेम्स में क्वालिफिकेशन के लिए 77 मीटर की लक्ष्मण रेखा पार करना अनिवार्य था। लेकिन रोहित ने उसे अपनी ‘पावर’ से काफी पीछे छोड़ दिया। अब भारत का प्रतिनिधित्व नीरज चोपड़ा के साथ हमारा रोहित करेगा। यानी, एशियन गेम्स में अब जौनपुर की ‘धाक’ दिखेगी।

सर्जरी के दर्द को बनाया अपनी ताकत

​करियर के बीच में आई कोहनी की गंभीर चोट और सर्जरी किसी भी खिलाड़ी का हौसला तोड़ने के लिए काफी थी। लेकिन रोहित ने हार नहीं मानी। रिहैब के उन कठिन दिनों में उनके भाई राहुल यादव और माता पुष्पा देवी का साथ उनका संबल बना। आज यह सफलता उन युवाओं के लिए एक ‘मोटिवेशन’ है, जो संसाधन न होने के कारण अपने सपने बीच में ही छोड़ देते हैं।

दभिया गांव में दिवाली जैसा माहौल

​रोहित की जीत पर दभिया गांव में जश्न का माहौल है। आज पूरे जौनपुर को अपने ‘लाल’ पर नाज है। रोहित यादव ने दिखा दिया है कि यदि रगों में जुनून और आंखों में सपना हो, तो गरीबी की दीवारें भी बौनी साबित होती हैं।

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Author: fastblitz24

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