बड़ागांव से जौनपुर जा रहे पैदल ज़ायरीनों की सेवा में उमड़े लोग; हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का दिया संदेश
शाहगंज:
बड़ागाँव से ” इंसान को बेदर्दी तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन…”—शायर के इसी प्रसिद्ध कलाम को चरितार्थ करते हुए 18 सफ़र के पवित्र मौके पर इंसानियत और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक अनुपम मिसाल देखने को मिली। दरगाह हज़रत अली पंजे शरीफ़, बड़ागांव से जौनपुर के लिए शुरू हुए पारंपरिक पदयात्रा सफ़र-ए-इश्क़-ए-हुसैन के तहत श्रद्धालुओं (ज़ायरीनों) के लिए मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट ‘भारत’ की ओर से पारसनाथ पेट्रोल पम्प, सुरीश पर सबीले इमाम हुसैन का आयोजन किया गया।
सैकड़ों ज़ायरीनों और ग्रामीणों ने किया जलपान
सुबह 5:00 बजे बड़ागांव से शुरू हुए इस जुलूस में शामिल सैकड़ों पैदल ज़ायरीनों का सबील स्थल पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सबील में पदयात्रियों के साथ-साथ मार्ग से गुजरने वाले आम ग्रामीणों और राहगीरों ने भी जलपान (अल्पाहार व शीतल पेय) ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि यह अकीदतमंदों का काफिला प्रतिवर्ष बड़ागांव से जौनपुर तक की दूरी पैदल तय करता है।
इमाम हुसैन (अ.स.) का पैगाम किसी एक धर्म के लिए नहीं: हुसैन हैदर
इस अवसर पर मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष हुसैन हैदर ने कहा कि “हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की महान शहादत केवल किसी एक समुदाय या धर्म के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण इंसानियत, त्याग, कुर्बानी और भाईचारे का पैगाम देती है।” उन्होंने कहा कि इसी पैगाम पर अमल करते हुए ट्रस्ट द्वारा बिना किसी धर्म या जातिगत भेदभाव के यह सबील लगाई गई है, जो वर्तमान दौर में इंसानियत और कौमी एकता का एक अनूठा उदाहरण है।
सामाजिक कार्यों को निरंतर जारी रखने का लिया संकल्प
सबील को सफल बनाने में मोहम्मद नईम सिराजी, सैय्यद सकलेन, शबी हैदर खान और मोहम्मद हसनैन खान की मुख्य व सराहनीय भूमिका रही। इस दौरान मोहम्मद लारेब खान सहित ट्रस्ट के समस्त सदस्यों ने जुलूस में शामिल ज़ायरीनों का शुक्रिया अदा किया और सभी सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट के सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी इसी तरह सभी धर्मों के अवसरों पर सामाजिक, जनकल्याणकारी व सौहार्दपूर्ण कार्य निरंतर करते रहेंगे।




