तेहरान। ईरान और अमेरिका में जारी तनाव के बीच भारत के महत्वपूर्ण निवेश चाबहार पोर्ट को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल, चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी पाबंदियों में मिली छूट आने वाली 26 अप्रैल को खत्म हो रही है। ऐसे में अगर अमेरिका अगर छूट को नहीं बढ़ाता है तो भारतीय निवेश के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, भारत ने कहा है कि चाबहार पोर्ट में अपने हितों की रक्षा के लिए वह अमेरिका के संपर्क में है। इस बीच ईरान के एक प्रमुख उच्च स्तरीय अधिकारी ने भारत के साथ संबंधों को अटूट बताया है और कहा है कि ईरान और भारत के रिश्तों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सालार वेलायतमदार ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के रिश्तों में एक अहम आधार बताया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दुनिया में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। RT टीवी से बातचीत में वेलायतमदार ने कहा, ‘दुनिया की हालत अच्छी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति की हरकतें कतई गरिमापूर्ण नहीं हैं। उन्होंने हर देश में उथल-पुथल पैदा कर दी है और वे देश अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। इसमें हमारे मित्र देश भारत के महान लोग भी शामिल हैं।’


ईरानी अधिकारी ने भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया और कहा कि दोनों देश भाषा, संस्कृति और परंपरा में गहरी समानता साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज भारत और ईरान के मजबूत बंधनों को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। वेलायदमदार ने कहा कि हमने अपने पारस्परिक हितों को सुरक्षित करने के लिए चाबहार में भारत के निवेश के समझौते को अंतिम रूप दिया था।
चाबहार पोर्ट में निवेश को सुरक्षित रखने को लेकर दिए गए भारत के हालिया बयानों को लेकर ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य ने कहा कि भारतीय पक्ष तर्कसंगत है। भारतीय अधिकारी समझते हैं कि दुश्मन और प्रतिद्वंद्वियों की उत्तेजक कार्रवाइयों का इन साझेदारी पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमारे विचार से इसमें कुछ भी नहीं बदला है। ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को उन्होंने विदेशी साजिश बताया और कहा कि ईरान ने सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल कर दी है।
Author: fastblitz24



