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ठाकुरवाणी महिला विकास कल्याण समिति ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए चलाया जागरूकता अभियान

 

जौनपुर। सिंगरामऊ में ठाकुरवादी महिला विकास कल्याण समिति ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के उद्देश्य से एक जागरूकता अभियान चलाया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) विजय पांडे थे, जिनका संस्था प्रमुख डॉ. अंजू सिंह ने स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (PCMA) के बारे में जानकारी दी, जो 1 नवंबर 2007 से प्रभावी है। यह कानून बाल विवाह को प्रतिबंधित करता है और इसमें शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करता है।

मुख्य अतिथि विजय पांडे ने बताया कि अधिनियम के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह अवैध माना जाता है। बाल विवाह करने वाले वयस्क पुरुष को 2 वर्ष तक की कठोर कारावास और/या ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। विवाह संपन्न कराने, बढ़ावा देने या अनुमति देने वाले व्यक्तियों पर भी समान दंड लागू होता है, हालांकि महिला को कारावास नहीं बल्कि केवल जुर्माने का प्रावधान है।

उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित पक्ष बालिग होने के दो वर्ष के भीतर जिला न्यायालय में विवाह निरस्त कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इस अधिनियम के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में आते हैं, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकती है।

कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकारों द्वारा बाल विवाह निषेध अधिकारी (CMPO) नियुक्त किए जाते हैं, जिन्हें बाल विवाह रोकने की विशेष शक्तियां प्राप्त हैं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ जागरूक रहें और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

संस्था प्रमुख डॉ. रणजीत सिंह ने जोर देकर कहा कि समाज के सहयोग से ही “बाल विवाह मुक्त भारत” का संकल्प साकार हो सकता है। इस जागरूकता कार्यक्रम में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक, महिलाएं और युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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Author: fastblitz24

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