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रूस में 1952 के बाद का सबसे भीषण भूकंप: ‘रिंग ऑफ फायर’ बना ‘असली विलेन’, सुनामी का खतरा मंडराया

नई दिल्ली। रूस के कामचटका प्रायद्वीप में आज सुबह एक शक्तिशाली भूकंप ने धरती को हिलाकर रख दिया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 8.8 से अधिक मापी गई। यह 1952 के बाद इस क्षेत्र में आया सबसे भीषण भूकंप है, जिसने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई, बल्कि जापान और प्रशांत तट के अन्य इलाकों में भी सुनामी का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

रूसी विज्ञान अकादमी की भूभौतिकीय सेवा की कामचटका शाखा ने पुष्टि की कि बुधवार को आया यह भूकंप 1952 के बाद का सबसे शक्तिशाली था, जिससे तट पर खतरनाक सुनामी लहरें उठने लगीं। सेवा ने टेलीग्राम पर एक बयान में कहा, “इस घटना के पैमाने को देखते हुए, हमें 7.5 तीव्रता तक के शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स की उम्मीद करनी चाहिए। 7.5 तीव्रता तक के महत्वपूर्ण, ध्यान देने योग्य आफ्टरशॉक्स कम से कम एक महीने तक जारी रहने की उम्मीद है।”

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इस भीषण भूकंप के पीछे एक बार फिर ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring of Fire) का नाम सामने आया है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैली एक विशाल ज्वालामुखीय और भूकम्पीय श्रृंखला है, जिसे इसी कारण ‘रिंग ऑफ फायर’ नाम दिया गया है। यह विभिन्न टेक्टोनिक प्लेट किनारों के सहारे लगभग 40,000 किलोमीटर तक फैली हुई है। दुनिया के लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं, और पृथ्वी पर मौजूद सभी सक्रिय ज्वालामुखियों में से 75% (यानी 452 सक्रिय ज्वालामुखी) इसी क्षेत्र में स्थित हैं।’रिंग ऑफ फायर’ पृथ्वी की लिथोस्फेरिक प्लेटों की लगातार हलचल और टकराव का सीधा परिणाम है, जिससे यह क्षेत्र भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोटों के लिए अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।

‘रिंग ऑफ फायर’ पर कई देशों के इलाके बसे हुए हैं, जिनमें बोलीविया, चिली, इक्वाडोर, पेरू, कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, मेक्सिको, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, रूस, जापान, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका शामिल हैं। इन देशों को लगातार भूकंपीय गतिविधियों और ज्वालामुखी विस्फोटों का सामना करना पड़ता है।

 

 

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Author: fastblitz24

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