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यूजीसी बिल से बढ़ेगा जातिगत भेदभाव, यूजीसी बिल को लेकर अशोक सिंह का बयान

 

जौनपुर। देश के संविधान में सामाजिक समरसता और जाति विहीन समाज की स्थापना के लिए पर्याप्त प्रावधान मौजूद है। ऐसे में विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण नियम बनाना निरर्थक है। जाति वर्ग या वर्ण के नाम पर नए नियम सामाजिक संतुलन को प्रभावित करते हैं इसलिए सरकार को इस विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए।

वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े नए विधेयक पर अस्थाई रोक लगाई जाने का कई सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी स्वागत किया है। उक्त बातें मीडिया से बात करते हुए समाज विकास क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि दूसरी और यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षा जगत के एक बड़े वर्ग का कहना है कि यूजीसी से संबंधित यह नया विधेयक समाज के किसी भी वर्ग या समुदाय के विरुद्ध नहीं है जबकि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि ऐसे विधायक लाने से समाज की आपसी भाईचारे की नींव कमजोर होती है।

एक वर्ग दूसरे वर्ग से नफरत करने लगता है क्या यह समाज के हित में होगाघ् सवर्ण और अन्य समुदायों के बीच यह बहुत बड़ी खाई बन सकती है इसलिए इस बिल को निरस्त किया जाना चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पहले भी मंडल कमीशन के जरिए इस तरह का प्रयास किया गया था और उसका नतीजा पूरे देश ने भोगा था। श्री सिंह ने कहा कि यह केवल वोट की राजनीति का स्टंट है केवल वोट की खातिर समाज को बांट देना समझ में आपसी कल पैदा कर देना बिल्कुल ही अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस विधेयक पर रोक लगाकर एक अच्छा कदम उठाया है लेकिन हमारी मांग है कि इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया जाए। यह बिल समाज में विघटन पैदा करती है।

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Author: fastblitz24

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