वाराणसी : उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन (विजिलेंस) टीम का ‘ऑपरेशन क्लीन’ पूरी रफ्तार से जारी है। लखीमपुर खीरी के जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय में 20 हजार रुपये की घूस लेते पकड़ी गईं महिला लिपिक रेखा मिश्रा की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक महकमे में तहलका मचा दिया है। इस ताज़ा कार्रवाई ने कुछ समय पहले वाराणसी (काशी) में वाणिज्य कर विभाग की महिला असिस्टेंट कमिश्नर की घूसखोरी में हुई गिरफ्तारी की यादें फिर से ताजा कर दी हैं।
”जाओ पैसे मैडम को दे दो” — DPRO दफ्तर में 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ी गईं महिला बाबू!
लखीमपुर खीरी में विजिलेंस की टीम ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए DPRO कार्यालय की महिला लिपिक रेखा मिश्रा को 20,000 रुपये नकद रिश्वत लेते हुए मौके पर ही धर दबोचा।
क्या है पूरा मामला?
- पीड़ित की मजबूरी: विकास खंड कुंभी की ग्राम पंचायत बेड़ा मुल्तान में तैनात सफाई कर्मचारी अखिलेश (अवधेश) अपने एक विभागीय आदेश व निस्तारण के लिए दफ्तर के चक्कर काट रहा था।
- रिश्वत का दबाव: काम करने के एवज में महिला बाबू रेखा मिश्रा ने सीधे 20 हजार रुपये का रेट तय कर दिया।
- एंटी करप्शन का ट्रैप: परेशान होकर सफाईकर्मी ने लखनऊ विजिलेंस से गुपचुप शिकायत कर दी। टीम ने जाल बिछाया और जैसे ही अखिलेश ने केमिकल लगे नोट मैडम बाबू को थमाए, विजिलेंस ने रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी को लिखापढ़ी के बाद लखनऊ ले जाया गया है।
DPRO पर भी लटकी तलवार
गिरफ्तारी के बाद पीड़ित सफाईकर्मी अखिलेश ने मीडिया के सामने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे खेल में अकेले बाबू नहीं, बल्कि खुद DPRO और दो अन्य लोग भी शामिल थे, जिन्होंने उससे कहा था— “जाकर पैसे मैडम को दे दो।” इस बयान के बाद पूरे पंचायत राज विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
20 हजार में तय हुआ था सौदा, नोट थमाते ही विजिलेंस ने लखीमपुर में दबोचा
लखीमपुर से पहले वाराणसी में भी विजिलेंस की टीम ऐसा ही बड़ा धमाका कर चुकी है। वाणिज्य कर (Commercial Tax/GST) विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर (ग्रेड-2) अंजलि चौरसिया को एंटी करप्शन टीम ने 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के एक ऑटोमोबाइल व्यापारी की फर्म के असेसमेंट और फाइल क्लीयरेंस के नाम पर मैडम असिस्टेंट कमिश्नर लंबे समय से कट मांग रही थीं। तंग आकर व्यापारी ने वाराणसी एंटी करप्शन इकाई से संपर्क किया। विजिलेंस टीम ने तय रणनीति के तहत मैडम अधिकारी को उनके दफ्तर में ही 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा था।
चाहे लखीमपुर खीरी का DPRO दफ्तर हो या बनारस का वाणिज्य कर विभाग — सरकारी सिस्टम में बैठकर जनता का खून चूसने वाली इन महिला अफसरों व कर्मचारियों पर विजिलेंस का चाबुक जमकर चला है। लखीमपुर की ताज़ा घटना ने यह साफ कर दिया है कि योगी सरकार में घूसखोरी करने वालों की जगह दफ्तर की कुर्सी नहीं, बल्कि जेल की सलाखें हैं! अब देखना यह होगा कि लखीमपुर में पीड़ित द्वारा सीधे DPRO पर लगाए गए आरोपों पर शासन क्या एक्शन लेता है।




