जौनपुर: शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को आत्मसात करने का भी माध्यम है। इस शाश्वत सत्य को डॉ. रिज़वी लर्नर्स अकादमी के विद्यार्थियों ने अपने संस्थापक व अध्यक्ष डॉ. अख्तर हसन रिजवी के जन्मदिवस पर चरितार्थ किया। छात्रों ने इस विशेष अवसर को सेवा और समर्पण के एक अनूठे रूप में मनाकर मिसाल कायम की।

विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रूचि शर्मा के कुशल नेतृत्व में, विद्यार्थियों ने सबसे पहले शहर के वृद्धाश्रम (ओल्ड एज होम) का दौरा किया। यहाँ उन्होंने बुजुर्गों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताया, उन्हें आत्मीयता से उपहार भेंट किए और उनके चेहरों पर मुस्कान लाकर मानो जन्मदिवस की सबसे सुंदर भेंट अर्पित की। बच्चों ने न केवल बुजुर्गों की जीवन कथाएँ सुनीं, बल्कि उनसे ढेर सारा आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस भावुक अवसर पर शिक्षकों ने बच्चों से यह वादा भी लिया कि वे जीवन पर्यंत अपने माता-पिता और दादा-दादी की सेवा को अपना परम धर्म मानेंगे।
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कार्यक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव रचना विशेष विद्यालय रहा, जहाँ रिज़वी लर्नर्स अकादमी के छात्रों ने दिव्यांग बच्चों के साथ मिलकर स्नेह और समर्पण की एक अद्भुत मिसाल कायम की। खेलकूद, बातचीत, हंसी-ठिठोली और गीतों के साथ बच्चों ने यह साबित कर दिया कि दिलों को छूने के लिए शब्दों की नहीं, बल्कि सच्ची भावनाओं और संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है।
विद्यालय के प्रबंधक कर्रार हुसैन रिजवी (राशिद) ने इस पहल पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “डॉ. रिजवी का पूरा जीवन समाज के वंचित और ज़रूरतमंद वर्गों के लिए समर्पित रहा है। बच्चों द्वारा उनकी इसी सोच को कर्म में बदलते देखना मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है।” प्रधानाचार्या डॉ. रूचि शर्मा ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमारे फाउंडर का सपना था कि हमारे विद्यार्थी केवल अच्छे छात्र ही नहीं, बल्कि अच्छे इंसान भी बनें। आज उन्होंने इस सपने को बखूबी साकार किया है।” शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए यह भावुक संदेश भी दिया कि जिस घर में बुजुर्गों की सेवा होती है, वहां ईश्वर स्वयं निवास करते हैं।
डॉ. अख्तर हसन रिजवी को भी इस कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा, “मुझे अपने विद्यालय के छात्रों पर गर्व है, जिन्होंने आज मानवता का सबसे सुंदर और महत्वपूर्ण पाठ पढ़ा है।”
इस पूरे आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जन्मदिवस केवल मोमबत्तियाँ बुझाने और केक काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी के जीवन में आशा और खुशी की रोशनी भरने का एक सुनहरा अवसर भी है। यह प्रेरणा देता है कि सभी को अपने जन्मदिवस पर सेवा भाव का कोई न कोई कार्य अवश्य करना चाहिए।
Author: fastblitz24



