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भ्रष्टाचार की जांच या गुंडई का अखाड़ा? ₹46 लाख के घोटाले की जांच के दौरान सरेआम मारपीट, वीडियो वायरल!

  • जांच टीम के सामने ही उड़ीं कानून की धज्जियां; शिकायतकर्ताओं का गंभीर आरोप—दोषियों को बचाने के लिए प्रशासन कर रहा ‘लीपापोती’!

जौनपुर। भ्रष्टाचार की परतें खुलने के डर से क्या अब रसूखदार गुंडई पर उतर आए हैं? ताजा मामला सिरकोनी विकासखंड के बिशनपुर मछवारा ग्रामसभा का है, जहां जनता की गाढ़ी कमाई के 46 लाख रुपये के कथित घोटाले की जांच करने पहुंची टीम के सामने ही लोकतंत्र और कानून की धज्जियां उड़ा दी गईं। जांच के दौरान ही शिकायतकर्ताओं और विपक्षियों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिसका लाइव वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

​जांच के नाम पर ‘लीपापोती’ का खेल?

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिशनपुर मछवारा ग्रामसभा में हुए भारी वित्तीय भ्रष्टाचार की फाइलें खंगालने जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तो वहां का माहौल पहले से ही गर्म था। शिकायतकर्ताओं का सीधा और गंभीर आरोप है कि जांच टीम निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय मामले में लीपापोती करने और असली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही थी। इसी बात को लेकर जब विरोध दर्ज कराया गया, तो बात इतनी बढ़ी कि नौबत सरेआम हाथापाई और मारपीट तक आ पहुंची।

बड़ा सवाल: सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में इस कदर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाना क्या यह साबित नहीं करता कि घोटालेबाजों को किसी का डर नहीं है?

 

​पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फिर भी हौसले बुलंद!

​यह कोई पहला मामला नहीं है जहां इस ग्रामसभा में धांधली की बात सामने आई हो। इससे पहले हुई शुरुआती जांच में 29 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हो चुकी थी, जिस पर कार्रवाई भी की गई थी। लेकिन बावजूद इसके, भ्रष्टाचार का यह घड़ा फूटकर अब 46 लाख तक पहुंच गया है। कार्रवाई के बाद भी इतनी बड़ी रकम का हेरफेर होना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

​मुख्य बिंदु: जो इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बनाते हैं

  • अधिकारियों की लाचारी: जांच टीम के सामने मारपीट होती रही, लेकिन हुक्मरान मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।
  • दोषियों को संरक्षण का आरोप: शिकायतकर्ताओं का साफ कहना है कि प्रशासन बड़ी मछलियों को बचाने के लिए जांच को भटका रहा है।
  • सोशल मीडिया पर फजीहत: सरेआम हुई इस गुंडागर्दी का वीडियो वायरल होने के बाद जौनपुर प्रशासन की कानून व्यवस्था पर उंगलियां उठ रही हैं।

​अब देखना यह होगा कि इस गुंडागर्दी और 46 लाख के घोटाले पर जिला प्रशासन क्या सख्त रुख अपनाता है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी फाइलें दबा दी जाएंगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, जौनपुर।

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Author: fastblitz24

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