Fastblitz 24

वैश्विक स्तर पर फहर रही हिन्दी की दुंदुभी पताका, डा यदुवंशी

 

जौनपुर। भारत की संस्कृति, सभ्यता और पहचान में अहम योगदान निभाने वाली हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि हमें अपनी भाषा की जड़ों से जोड़ने और इसके गौरव को संजोने का अवसर भी देती है। 10 जनवरी महज एक तारीख नहीं, बल्कि वह ऐतिहासिक दिन है जब हिंदी ने भारत की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाई थी। उक्त विचार नागरी लिपि परिषद वीर बहादुर सिंह पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय जौनपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ ब्रजेश कुमार यदुवंशी ने सिविल लाइंस स्थित एक होटल पवन प्लाजा में आयोजित विश्व हिंदी दिवस पर व्यक्त किया। इस दौरान प्रख्यात साहित्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर को नागरी सम्मान से सम्मानित किया गया।

इसी क्रम में अपने सम्बोधन में श्री प्रखर ने कहा कि 10 जनवरी 1975 के दिन भारत के नागपुर शहर में ‘प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन का मकसद हिन्दी को दुनिया भर में पहचान दिलाना था, इसलिये हर साल 10 जनवरी को ‘विश्व हिंदी दिवस’ मनाया जाता है।

भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष फूलचन्द भारती ने कहा कि दुनिया भर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता फैलाने के लिये यह दिन हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। पूर्व अध्यक्ष दीवानी अधिवक्ता संघ जितेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि इसे मनाये जाने का मूल उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिन्दी को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर शैलेन्द्र सिंह, अमर शिवांशु सिंह, अनिल केसरी, राहुल, उद्योगपति किशन सिंह, अनुज यादव, रिंकेश राव, विनीत सिंह, सत्यम मौर्य, ऋषभ पाठक, ओम प्रकाश पाठक, रोहित यादव, सचिन यादव, नीलेश यादव, रंगनाथ द्विवेदी, शिवम सिंह, विशाल मौर्य, मेजर जमालुद्दीन, आशुतोष सिंह, नीरज सिंह, प्रणविजय सिंह, डॉ अवधेश यादव, डॉ अरविन्द यादव, रवि श्रीवास्तव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

fastblitz24
Author: fastblitz24

Spread the love

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज