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डीएम के आदेश भी बेअसर: जौनपुर के 250 खिलाड़ियों का नहीं हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

करंजाकला पीएचसी की घोर लापरवाही, जिलाधिकारी के कड़े रुख के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सोया कुंभकर्णी नींद

 

जौनपुर।

​उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जहां सूबे में ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ अभियान को रफ्तार देने में जुटे हैं, वहीं जौनपुर का स्वास्थ्य महकमा उनके मंसूबों पर पानी फेरने में लगा है। ताजा मामला शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम का है, जहां जिला अधिकारी (डीएम) के सख्त आदेश के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी करीब ढाई सौ जूनियर और सीनियर खिलाड़ियों का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) करंजाकला की इस घोर लापरवाही से खिलाड़ियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने दिए थे कड़े निर्देश

​आपको बता दें कि दो सप्ताह पूर्व जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन ने जिला खेलकूद कार्यालय और इंदिरा गांधी स्टेडियम परिसर का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने खेल परिसर में पसीना बहा रहे खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जाना। खिलाड़ियों की सेहत को सर्वोपरि रखते हुए डीएम ने मौके पर ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करंजाकला के चिकित्सा प्रभारी को कड़े निर्देश जारी किए थे।

​डीएम ने स्पष्ट कहा था कि दो दिन के भीतर खिलाड़ियों को ओआरएस (ORS) के पैकेट उपलब्ध कराए जाएं और डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित कर सभी ढाई सौ खिलाड़ियों का तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। डीएम ने इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी थी।

दो सप्ताह बीते, नहीं पहुंची डॉक्टरों की टीम

​डीएम के आदेश के बाद खेल विभाग की सक्रियता से 19 मई को खिलाड़ियों के बीच ओआरएस पैकेट का वितरण तो कर दिया गया, लेकिन असली समस्या जस की तस बनी हुई है। दो सप्ताह का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी करंजाकला पीएचसी से डॉक्टरों की कोई टीम इंदिरा गांधी स्टेडियम नहीं पहुंची। आलम यह है कि कड़े अभ्यास के दौरान आए दिन खिलाड़ियों को कोई न कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या आ रही है, जिसके लिए वे आसपास के प्राइवेट डॉक्टरों से महंगा इलाज कराकर काम चलाने को मजबूर हैं। खेल विभाग के जिम्मेदारों ने स्वास्थ्य परीक्षण के लिए अपने स्तर से भी प्रयास किए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

“डीएम साहब के आदेश पर 19 मई को ओआरएस का पैकेट तो आकर प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों को वितरित कर दिया गया था, लेकिन उनका स्वास्थ्य परीक्षण होना बेहद जरूरी था। इस संबंध में जिलाधिकारी का सख्त आदेश भी था, परंतु दो सप्ताह बाद भी अभी तक कोई स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हुआ है। मैदान पर कड़ा अभ्यास कर रहे इन नौनिहालों और सीनियर खिलाड़ियों की सेहत के लिए यह परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।”

— चंदन सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी, जौनपुर

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Author: fastblitz24

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