
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रचंड जीत और महागठबंधन की करारी हार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की 243 सीटों में से 202 सीटें जीतने वाले एनडीए की बढ़त उन ज़िलों में भी देखने को मिली, जिन्हें पहले विपक्ष का गढ़ माना जाता था.


चुनावी आंकड़ों पर करीब से नज़र डालें, तो एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आता है: 174 सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाता सूची के नामों की संख्या से कम था. महत्वपूर्ण यह है कि इनमें से 91 सीटों पर 2020 और 2025 चुनाव के बीच दलों की स्थिति बदल गई है. इस बार के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने यहां 75 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन सिर्फ 15 पर जीत हासिल कर सकी और एक सीट छोटी पार्टियों के खाते में गई.
वहीं, 2020 के चुनाव परिणाम पर नज़र डालें, तो महागठबंधन के पास इन 91 सीटों में से 71 सीटें थीं और एनडीए के पास मात्र 14 सीटें, जो इस बार के चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से बढ़कर 75 हो गई हैं. इसे कुछ सीटों के उदाहरण से समझा जा सकता है..
भाजपा ने 2025 में कुरहानी सीट मात्र 616 मतों के अंतर से जीती है, जबकि इस निर्वाचन क्षेत्र में 24,000 से अधिक मतदाता सूची से नाम काटे गए हैं. कुरहानी सीट पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पास थी, जो इस बार उनसे छिन गई है. इससे पता चलता है कि कैसे एक कम-मार्जिन वाली सीट एनडीए की ओर झुक गई.
जनता दल (यूनाइटेड) (जदयू) ने संदेश सीट पर केवल 27 मतों से कब्ज़ा किया है, जबकि यहां 25,682 मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं. यह सीट 2020 में राजद के पास थी, लेकिन इस चुनाव चक्र की सबसे कम अंतर वाली जीत में से एक में अब ये जदयू के खाते में चली गई है. राजद ने मटिहानी सीट 5,290 मतों से जीती है, लेकिन इस सीट पर 33,700 से ज़्यादा मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं. 2020 में यह सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के पास थी.
इससे ये पता चलता है कि महागठबंधन को भी कुछ सीटों पर फायदा पहुंचा है. हालांकि, ये एनडीए की तुलना में काफ़ी कम है. गौरतलब है कि एनडीए की जीत 2020 और 2025 के बीच 100 सीटों पर जीत के कारण संभव हुई. लेकिन इनमें से 75 सीटें ऐसी भी थीं, जहां से हटाए गए मतदातासूची के नामों की संख्या एनडीए के जीत के अंतर से ज़्यादा थी.
ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों से इन सीटों पर एनडीए का पलड़ा भारी हो गया. केरल कांग्रेस ने दावा किया है कि एनडीए की 202 सीटों में से 128 सीटों पर जीत एसआईआर के दौरान कथित मतदाताओं के नाम काटे जाने का नतीजा है. पार्टी का कहना है कि हजारों असली वोटरों के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए और यही ‘धांधली’ एनडीए की भारी जीत की असली वजह बनी.
केरल कांग्रेस का दावा है कि उसने चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी किए गए मतदाता विलोपन डेटा का विश्लेषण किया और उसे हर सीट के जीत के अंतर से मिलाया. पार्टी का दावा है कि वोटरों को एसआईआर प्रक्रिया में मनमाने ढंग से हटाया गया. केरल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एसआईआर का उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान बताई गई थी. लेकिन जारी डाटा में एक भी अवैध प्रवासी नहीं मिला, न बांग्लादेश से, न म्यांमार से, न नेपाल से. पार्टी के अनुसार, असल में गरीब और कमजोर वर्ग के वोटरों को हटाकर चुनाव को मैनेज किया गया. पार्टी ने पीएम मोदी के ‘लोकतंत्र की जननी’ वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा कि अगर यह ‘गेम प्लान’ नहीं समझा गया, तो भाजपा एक-एक कर सभी नागरिकों को वोटर लिस्ट से हटाकर उनकी जगह फर्जी नाम जोड़
Author: fastblitz24



