‘वृक्ष हमारे मामा और नदियां हमारी मौसी’

नवगठित ‘जानकी दल’ ने लिया प्रकृति की रक्षा का संकल्प

जगद्गुरु वैदेही बल्लभ देवाचार्य ने दिलाई नित्य जानकी पूजा की सौगंध
जलालपुर/जौनपुर (ब्यूरो):

जौनपुर जिले के जलालपुर अंतर्गत पुरेव गांव स्थित बड़कू हनुमान आश्रम में चल रहे ‘अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुम्भ’ का सातवां दिन पूरी तरह से प्रकृति संरक्षण के नाम रहा। इस दौरान आश्रम परिसर में एक बेहद भावुक और अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब हजारों महिलाओं ने प्रकृति के साथ अपना एक नया और अटूट रिश्ता जोड़ा। महाकुम्भ में प्रकृति से रिश्तों की एक नई परिभाषा गढ़ते हुए वृक्षों को ‘मामा’ और नदियों को ‘मौसी’ का दर्जा दिया गया।


भावुक हुईं महिलाएं, पेड़ों को घेरे में लेकर लगाया गले
समारोह के दौरान जब जोधपुर से पधारे रामानंदी सम्प्रदाय के जगद्गुरु वैदेही बल्लभ देवाचार्य जी महाराज, विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी और बड़कू हनुमान जी आश्रम के पीठाधीश्वर प्रभु रामदास जी महाराज ने संयुक्त रूप से आह्वान किया कि भारत की नारियां अब वृक्षों को सिर्फ पूजेंगी नहीं, बल्कि अपने बेटे और भाई की तरह पालेंगी भी, तो पंडाल में मौजूद हजारों महिलाएं भावुक होकर वृक्षों की ओर दौड़ पड़ीं। नवगठित ‘जानकी दल’ की महिलाओं ने पेड़ों को चारों तरफ से घेरकर उन्हें गले लगा लिया।
धरती पुत्री जानकी हमारी माता, तो पेड़ हमारे मामा: डॉ. राजीव श्रीगुरुजी
राम पंथ के पंथचार्य और जानकी दल के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने इस अनूठे रिश्ते की व्याख्या करते हुए कहा:
”धरती पुत्री माता जानकी हम सभी की माता हैं। इस नाते धरती के पुत्र पेड़ और पहाड़ माता जानकी के भाई हुए। इसी पावन रिश्ते से पेड़ और पहाड़ हमारे ‘मामा’ हैं और नदियां हमारी ‘मौसी’ हैं, जिनकी रक्षा करना हम सभी का परम कर्तव्य है।”

माता जानकी का चरित्र ही प्रकृति और परिवार को बचा सकता है: जगद्गुरु
कथा व्यास पीठ से जगद्गुरू वैदेही बल्लभ देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि माता जानकी ने हमेशा प्रकृति से प्रेम का संदेश दिया। आज नारी महाकुम्भ के माध्यम से महिलाएं सामाजिक क्रांति की ओर बढ़ रही हैं। वहीं, ‘मातु जानकी कथा’ में जगद्गुरु बालक देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि माता जानकी स्वयं धरती पुत्री हैं और उन्होंने प्रकृति संरक्षण के लिए ही वनवास को सहर्ष अपनाया था। आज यदि दुनिया माता जानकी के चरित्र को अपना ले, तो परिवार और प्रकृति दोनों को विनाश से बचाया जा सकता है।

21 हजार महिलाएं मामा (वृक्ष) की छांव में बिताएंगी समय
सिद्धपीठ बड़कू हनुमान आश्रम के पीठाधीश्वर प्रभु रामदास जी महाराज ने इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि अब 21 हजार महिलाएं अपने मायके के पक्ष को मजबूत करेंगी। ये महिलाएं वृक्ष को अपना मामा मानकर वर्ष में एक दिन उनकी छांव में बिताएंगी। अब यह तय है कि भारत की नारियां या तो मां जानकी के आंचल में रहेंगी या फिर अपने मामा (वृक्ष) की छांव में सुरक्षित रहेंगी।
समारोह में ये रहे मुख्य रूप से उपस्थित
इस भव्य और ऐतिहासिक धार्मिक-सामाजिक आयोजन में मुख्य रूप से राम पंथ के धर्म प्रवक्ता डॉ. कवीन्द्र नारायण, प्रसिद्ध समाज सेवी शैलेंद्र शुक्ला, प्रोफेसर पंकज मिश्रा, विवेक मिश्रा, आदर्श मिश्रा शामिल हुए। इसके साथ ही विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. मृदुला जायसवाल, डॉ. नजमा परवीन, आभा उपाध्यक्ष, नौशाद दुबे, ओबैदुल्लाह दुबे, दक्षिता, खुशी, इली, उजाला भारतवंशी, जीनत रहमान और एलिजा सहित भारी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Author: fastblitz24



