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जौनपुर में ‘दूल्हे’ की हत्या पर रार बरकरार : खामोश क्यों है प्रशासन? सौम्या के अनिश्चितकालीन धरने को मिला SUCI(C) का साथ

1 मई की शाम, दूल्हे की मौत का मातम: साजिशकर्ता खुलेआम घूम रहे, पुलिस बनी मूकदर्शक

जौनपुर:

जिले के खेतासराय में 1 मई 2026 की वह काली रात कोई नहीं भूला, जब शादी के जश्न में डूबे एक घर से मातम की चीखें उठी थीं। दूल्हे आजाद बिंद की सरेआम गोली मारकर हत्या करने वाले दरिंदे आज भी कानून की पकड़ से दूर हैं। पुलिस की लचर कार्यशैली और मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने की कोशिशों ने मृतक की बहन सौम्या बिंद को इंसाफ के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है। 18 जून से जिलाधिकारी कार्यालय पर जारी उनका अनिश्चितकालीन धरना अब शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

‘इंसाफ नहीं, तो घर पर बुलडोजर चलाओ’: सौम्या बिंद का हुंकार

​सौम्या बिंद का आक्रोश सातवें आसमान पर है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और साजिशकर्ताओं के घर बुलडोजर नहीं चलता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शासन-प्रशासन का रवैया न तो निष्पक्ष है और न ही पारदर्शी। अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार इंसाफ की भीख मांगने को मजबूर है।

एसयूसीआई(सी) का जोरदार समर्थन: “अपराधियों को जेल भेजो, वरना तैयार रहें परिणाम”

​30 जून का दिन इस आंदोलन के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। एसयूसीआई (सी) के दिग्गज नेताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर सौम्या बिंद के संघर्ष को अपना समर्थन दिया और हुंकार भरी कि जौनपुर में गुंडाराज नहीं चलने दिया जाएगा।

​पार्टी के राज्य सचिव रविशंकर मौर्य और जिला सचिव अशोक कुमार खरवार ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हत्यारे तुरंत गिरफ्तार नहीं किए गए, तो आंदोलन और भी उग्र होगा। शासन की चुप्पी किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती है।”

प्रदर्शन में इनकी रही मुख्य उपस्थिति

​इस दौरान प्रमोद कुमार शुक्ल, इन्दुकुमार शुक्ल, दिलीप कुमार खरवार, प्रवीण शुक्ल, श्रीपति सिंह, रामप्यारे एडवोकेट, राजबहादुर विश्वकर्मा, अलगूराम पटेल, राकेश निषाद, विजयप्रकाश गुप्त, लालताप्रसाद मौर्य, संतोष कुमार प्रजापति, विनोद मौर्य, प्रवीण सिंह, विजय सिंह मौर्य, तालुकदार यादव, मालती प्रजापति, साधना निषाद, मीता गुप्ता, देवव्रत निषाद समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

क्या अपराधियों को बचा रही है पुलिस?

घटना के दो महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य साजिशकर्ता का पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहना, शासन की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जौनपुर में अपराधियों का खौफ इतना बढ़ गया है कि पुलिस के हाथ कांप रहे हैं? यह बड़ा सवाल अब हर जुबान पर है।

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Author: fastblitz24

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