खेतासराय पुलिस की कार्यप्रणाली के घेरे में आने से हड़कंप; लहूलुहान होकर सड़क पर गिरे पीड़ित की शिकायत के बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर, प्रभावशाली संरक्षण के लग रहे आरोप!
जौनपुर(ब्यूरो): जनपद के खेतासराय थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए दबंगों द्वारा एक युवक पर दिनदहाड़े जानलेवा हमला करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि घटना की लिखित तहरीर स्थानीय थाने में दिए जाने के बावजूद पुलिसिया तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है। अब तक न तो मुकदमा दर्ज किया गया है और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया है, जिससे पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है और क्षेत्र की जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

बाजार में घेराबंदी, ३०० मीटर तक दौड़ाकर बेरहमी से पीटा
मामला मनेछा गांव का है, जहां के निवासी हर्षित कुमार पुत्र महेंद्र प्रसाद ने गांव के ही कुछ लोगों पर इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। घटनाक्रम के अनुसार, ५ जून की दोपहर करीब एक बजे हर्षित घरेलू सामान की खरीदारी करने के लिए मनेछा फुरफुरी नगर बाजार गया हुआ था।


आरोप है कि उसी दौरान गांव के ही कुछ नामजद और उनके साथ मौजूद अन्य अज्ञात हमलावरों ने उसे सरेबाजार घेर लिया और लाठी-डंडों से प्रहार शुरू कर दिया। जान बचाने की नीयत से भाग रहे युवक को हमलावरों ने करीब ३०० मीटर की दूरी तक दौड़ाया और डिगवां-चक्साग्यास मार्ग के समीप दोबारा दबोच लिया। वहां उसकी इस कदर बेरहमी से पिटाई की गई कि वह बेहोश होकर सड़क किनारे गिर पड़ा। लहूलुहान हालत में पीड़ित को मरणासन्न समझकर हमलावर मौके से फरार हो गए।
इलाज के बाद न्याय की आस में भटक रहा परिवार
चीख-पुकार सुनकर जुटे लोगों और परिजनों ने आनन-फानन में अचेत हर्षित को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार किया। होश में आने के बाद पीड़ित ने पूरे मामले की नामजद लिखित शिकायत थाना खेतासराय में दर्ज करानी चाही, लेकिन पुलिस की कथित सुस्ती के चलते मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कई दिन बीतने के बाद भी जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने आखिरकार पुलिस अधीक्षक (एसपी) जौनपुर के द्वार पर दस्तक देकर प्रार्थना पत्र सौंपा और आरोपियों के खिलाफ अविलंब एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
गंभीर सवाल: आखिर किसके दबाव में हाथ पर हाथ धरे बैठी है पुलिस?
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय पुलिसिंग और खाकी की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि यदि दिनदहाड़े बाजार जैसी सार्वजनिक जगह पर किसी नागरिक को दौड़ा-दौड़ाकर अधमरा कर दिया जाता है और पुलिस मुकदमा दर्ज करने तक की जहमत नहीं उठाती, तो आम आदमी न्याय के लिए आखिर कहां जाए?
इलाके में इस बात की चर्चाएं आम हैं कि क्या हमलावरों को किसी राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके दबाव में पुलिस कार्रवाई से कतरा रही है? या फिर पुलिस प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? बहरहाल, एसपी के संज्ञान में मामला आने के बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना हो रही है।
नोट: हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस संबंध में स्थानीय पुलिस का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी समाचार में प्रमुखता के साथ स्थान दिया जाएगा।
Author: fastblitz24



