जौनपुर: जनपद में लावारिस मुस्लिम शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाने वाली ‘लावारिस शव इंतजामियां कमेटी’ एक बार फिर मानवता की मिसाल बनी है। सरपतहा थाना क्षेत्र से प्राप्त एक लावारिस शव को कमेटी ने पूरी मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ हम्ज़ा चिश्ती स्थित कब्रिस्तान में देर शाम सुपुर्द-ए-खाक किया। यह घटना समाज में ऐसे गुमनाम चेहरों के लिए सम्मान और शांति की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जिनके अपने कोई नहीं होते।

पुलिस विभाग से आरक्षी शिवेंद्र यादव ने जानकारी दी कि यह शव सुइथा कला गांव में हाइडल की बाउंड्री के पास मृत अवस्था में मिला था। पोस्टमार्टम के उपरांत, शव के मुस्लिम समुदाय का होने की पुष्टि होने पर इसे लावारिस शव इंतजामियां कमेटी को सौंप दिया गया। शव के हुलिए से मृतक की उम्र लगभग 45 वर्ष प्रतीत हो रही थी। कमेटी ने बिना किसी पहचान के इस अधेड़ व्यक्ति को पूर्ण धार्मिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। कमेटी के संस्थापक रियाजुल हक ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से लावारिस मुस्लिम शवों को दफन करने का यह सिलसिला लगातार जारी है। यह इसी क्रम में दफन किया गया 163वां शव था, जो कमेटी के अथक प्रयासों और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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इस मौके पर कमेटी के पदाधिकारी डॉ. आबिद, मास्टर मेराज और इम्तियाज सिद्दीकी बाबू, अकरम मंसूरी, नूरुद्दीन मंसूरी सहित कई सदस्य मौजूद रहे। हाफिज अजहर रशिदाबादी ने नमाज-ए-जनाजा अदा कराई, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने शिरकत की। कमेटी के अन्य सदस्यों का भी इस नेक कार्य में विशेष योगदान रहा।
Author: fastblitz24



